सरकारी शिक्षक को भी दिया आवास के लिए ऋण
कार्यालय संवाददाता| गंजबासौदा
मुख्यमंत्रीआवास योजना सरकार ने इसलिए संचालित की है कि प्रदेश में ऐसे गरीब लोगों को मकान मिल सकें जो आवास से वंचित हैं। झुग्गी झोपड़ी डाल कर रह रहे हैं। सरकार की इस योजना में केन्द्रीय सहकारी बैंक की उदयपुर शाखा ने सिर्फ पलीता लगा दिया बल्कि गरीबों और पात्र लोगोंं की जगह प्रभावी लोगों से साठ गांठ कर ऋण दे दिया। इससे बैंक द्वारा ऋण के रुप में बांटे गए रुपयों की वसूली भी खटाई में पड़ गई है।
शिकायत के बाद बैंक के महाप्रबंधक द्वारा कराई गई जांच में जो स्थिति सामने आई है वह चौका देने वाली है। उदयपुर शाखा के अंतर्गत 6 सोसायटियां आती हैं। 308 आवासों के लिए जो ऋण स्वीकृत है वह इस सोसायटी के अंतर्गत आने वाले गांवों में रहने वाले लोगों के नाम दिया गया है। तीन सदस्यीय जांच दल जब जांच के लिए मौके पर गया तो 45आवास लापता मिले, जिनके नाम पर पैसा निकाला जा चुका है।
जहांनहीं बने हैं कुटीर
रमेशचंद,समीम खां, (दाऊद बासौदा), अशोक सिंह, रानी बाई, राजेन्द्र सिंह दांगी (सिरनोटा), रनवीर सिंह रघुवंशी (बड़वासा), जगदीश विश्वकर्मा, चंद्रेश विश्वकर्मा (बावली), चंदनसिंह सेन, शुगरसिंह, कीरत सिंह यादव, महेन्द्र सिंह, मुकेश सिंह रघुवंशी (भाटनी), तखतसिंह दांगी, हरनाम हरिजन, प्रीतम सिंह, बलवीर सिंह, नंदलाल, गीताबाई, कल्याण सिंह दांगी, जगदीश मिश्रा, हल्कई साहू (किर्रोदा), नारायण सिंह, नरेन्द्र सिंह, धीरज सिंह रघुवंशी (खड़ाखेड़ी), जसमन हरिजन (ढिमरोली), शिवलाल हरिजन (पुरवाई), मिस्टर, हरिसिंह, वीरसिंह, शैलेन्द्र सिंह रघुवंशी (फतेहपुर), बलवीर प्रजापति, किशनसिंह यादव, आशाराम कुशवाह, पार्वती बाई, राजेन्द्र चौबे (बरेठ नाका), सुरेन्द्र सिंह, प्रहलादसिंह रघुवंशी (फतेहपुर), कीरत सिंह, कमल सिंह, अनीताबाई (भाटनी), मचलसिंह दांगी, बाबूलाल धानक (किर्रोदा), चैनसिंह, रामेश्वर गुर्जर (किसनोद) है। जांच दल को मौके पर कोई आवास नहीं मिला अर्थात बिना निर्माण ऋण दिया गया।
अपात्रों को दिया लाभ
जांचके दौरान यह तथ्य भी सामने आए कि ग्राम बावली के जिस जगदीश विश्वकर्मा को मुख्यमंत्री आवास के लिए ऋण दिया गया है वह शिक्षक है। जांच में चैनसिंह दांगी, नरेन्द्र सिंह रघुवंशी, धीरजसिंह, महेन्द्र सिंह, रनवीर सिंह रघुवंशी, मचल सिंह दांगी, बलवीरसिंह दांगी, बलवीर सिंह, धर्मेंन्द्र सिंह, शैलेन्द्र