अतिक्रमण पर नहीं नपा का जोर
सरकारी जमीन पर करते हैं लोग कब्जा
निर्माणकरते समय लोग आगे प्लाट पर बाउंड्रीवाल या वाहन पार्किंग के लिए जगह नहीं छोड़ते। बाद में मकान निर्माण के बाद गली में सरकारी जमीन पर पक्की बाउंड्रीवाल बनाकर अतिक्रमण करते हैं। उस गली या बस्ती में जब एक व्यक्ति ने पक्का निर्माण किया तो उसके बाद आसपास भी ऐसा ही सिलसिला चल पड़ता है। ऐसी ही हालत राजेंद्र नगर में बेतवा बर्रीघाट मार्ग पर है। वहां सड़क किनारे लोगों को ३०० वर्गफीट के प्लाट पट्टे पर दिए गए थे लेकिन जितनी भूमि मिली उससे दोगुनी जमीन पर कब्जा कर लिया गया। इसके बाद भी आगे- पीछे पड़ी खाली जमीन पर चबूतरे बनाकर अतिक्रमण चल रहा है।
निर्माणकार्य के दौरान ही नहीं होती कार्रवाई
निर्माणके दौरान नपा अतिक्रमण नहीं रोकती। बाद में अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई करती है तो उसका विरोध होता है। पूर्व पार्षद अशोक कौल का कहना है नपा निर्माण के दौरान ही सख्त कदम उठाए तो अतिक्रमण की समस्या पैदा ही हो सके। नगर में अतिक्रमण का कारण नपा और जनप्रतिनिधियों का ढीला रवैया है। इससे शहर बदसूरत हो रहा है। साथ ही अतिक्रमण की चपेट में आता जा रहा है।
सिर्फ नोटिस देती है नपा
नपाने दरोगा नियुक्त किए हैं लेकिन दरोगा तो रिपोर्ट देते हैं और जांच करते हैं। यदि दरोगा रिपोर्ट भी दे दे तो नपा द्वारा सिर्फ संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया जाता है। अतिक्रमण करने के बाद निर्माण 15 दिन बंद कर दिया जाता है। जैसे ही मामला ठंडा होता है, निर्माण फिर शुरू हो जाता है। वार्ड क्रमांक 13 निवासी परसराम दुबे ने बताया कि ऐसे कई निर्माण हंै जहां बाद में निर्माण फिर प्रारंभ हो गया।
चुनाव में मिला मौका
नपाचुनाव के दौरान एक महीने का समय अतिक्रमणकारियों के लिए काफी मुफीद रहा। स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका प्रबंधन चुनाव तैयारियों में लगा रहा। इसका मौका उठाकर कई लोगों ने सरकारी जमीन पर पक्के निर्माण कर लिए। अवैध निर्माण से मुख्य मार्ग की पटरियों और गलियों की लंबाई कम हो गई। मौका पाकर किए गए निर्माण की आड़ में अब पड़ोसी भी उसका लाभ उठाने की फिराक में हैं।
मिलंेगे करोड़ों रुपए
सेवानिवृत्तकर्मचारी तरवरसिंह रघुवंशी का कहना है जिन लोगों ने पूर्व में सरकारी जमीन पर पक्के निर्माण किए हैं, उन्हें नपा तोड़ नहीं पा रही। उनका सर्वे कराने के बाद नपा उनसे उस भूमि का किराया कले