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नो एंट्री से शहर में भारी वाहन आने से रुके लेकिन यातायात नहीं सुधरा

5 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता| गंजबासौदा

शहर में दिन के समय भारी वाहनों के प्रवेश पर लगाया गया प्रतिबंध भी बिगड़ी यातायात व्यवस्था को नहीं सुधार पाया। एसडीएम ने एक सप्ताह पहले सुबह 7 से रात 8 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई थी। इससे दिन में ट्रकों का प्रवेश तो बंद हो गया लेकिन बिगड़ी यातायात व्यवस्था में जरा भी सुधार नहीं आया।

सामाजिक और व्यापारिक संगठनों का मानना है कि जब तक यातायात को बिगाड़ने वाली परिस्थितियों में सुधार नहीं होता उस समय तक पटरी से उतरी यातायात व्यवस्था को सुधारना कठिन है। यातायात की अंदरूनी व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रशासन, पुलिस और नपा ने न तो कोई योजना बनाई है और न ही इस दिशा में विचार किया है।

पूरे शहर में पटरी गायब

सामाजिक कार्यकर्ता घनश्याम अग्रवाल ने बताया जितनी चौड़ी सड़कें नगर में हैं इतनी चौड़ी सड़कें पूरे जिले में कहीं देखने नहीं मिलती। प्रशासनिक कार्रवाई के अभाव और राजनैतिक हस्तक्षेप के कारण चौड़ी सड़कें संकरी गलियों में तब्दील होती जा रही हैं। पूरे शहर में फुटपाथ से लेकर खाली सरकारी जमीन गायब है। जब तक खाली जगह व पटरियां अतिक्रमण मुक्त नहीं होती यातायात व्यवस्था में सुधार की कल्पना करना बेकार है।

सुबह 7 से रात 8 बजे तक नहीं आते भारी वाहन
वैकल्पिक मार्ग निर्माण नहीं
पूर्व नपा प्रतिपक्ष नेता सौदान सिंह यादव का कहना है शहर में जितने मार्ग हैं आबादी या बाजार के बीच से ही निकलते हैं। आबादी के बाहर से यातायात निकालने के लिए अब तक न तो वैकल्पिक मार्ग बनाए गए हैं और न ही उनके निर्माण पर अब तक विचार किया गया है। आबादी के बाहर से जब तक रिंग रोड या वैकल्पिक मार्ग नहीं बनाए जाते नो एंट्री की समस्या का हल संभव नहीं है। दिन में व्यावसायिक वाहनों का प्रवेश बंद किए जाने से व्यापारियों के साथ नागरिकों पर सीधा असर पड़ रहा है।

नो एंट्री की समीक्षा कर बनाएंगे यातायात सुधारने की व्यवस्था
जल्दी ही नो एंट्री की समीक्षा की जाएगी। यातायात सुधार के लिए नपा से चर्चा की जाएगी। उपखंड का प्रभार तीन दिन का होने से इन समस्याओं पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। तृप्ति श्रीवास्तव, एसडीएम गंजबासौदा

अतिक्रमण मुक्त हों फुटपाथ
एडवोकेट संजय पुरोहित का कहना है यदि नगर का यातायात सुधारना है तो सड़क किनारे फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। फुटपाथ निर्माण कराया जाए। हॉकर्स जोन बनाए जाएं। बाजारों में पार्किंग स्थल बनाए जाएं। दुकानों के बाहर सामग्री रखने पर सख्ती से प्रतिबंध लगाया जाए।

पार्किंग और हॉकर्स जोन अधर में
जिला बनाओ अभियान समिति के शैलेंद्र सक्सेना का कहना है की घटना और दुर्घटना के बाद जब भी प्रशासन नागरिकों, व्यापारियों व राजनैतिक संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाता है बैठक समस्या और सुझाव तक सीमित हो जाती है। समस्या और सुझावों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। बैठकों में वाहन पार्किंग स्थल और हॉकर्स जोन बनाने की कई बार मांग भी उठाई गई। आश्वासन मिले किंतु मांग धरातल पर साकार नहीं हो पाई। इससे हाथ ठेले सड़क पर लग रहे हैं। वाहन सड़क पर खड़े हो रहे हैं। इससे यातायात व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है।

दुकानों से ज्यादा सामान सड़क पर
सेवा निवृत पंचायत अधिकारी प्रकाश दुबे ने बताया कि दुकानदार जितना सामान अंदर नहीं रखते उससे ज्यादा सड़क किनारे तक दुकान के सामने रखते हैं। इससे न तो वाहन पार्किंग की जगह रहती न वाहन खड़ा करने की। इसके कारण लोगों को मजबूरी में वाहन सड़क पर ही खड़े करना पड़ते हैं। इससे सड़क यातायात प्रभावित हो रहा है।

शहर में हर कहीं वाहनों के खड़े होने से बाधित होता है यातायात। - भास्कर

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