िसंचाई से घटा जल स्तर
कार्यालय संवाददाता| गंजबासौदा
मावठकी बारिश होने के कारण फसलों को पानी की आवश्यकता है। फसलों को बचाने के लिए किसान नदी, तालाब, कुओं और हैंडपंपों से सिचाई कर रहे हैं। इससे नदियों सहित अन्य जल स्त्रोतों सहित भूजल स्तर तेजी से घट रहा है। जल स्तर घटने से जल संकट पनपने लगा है। लगातार पानी के उपयोग से अंचल के 50 गांवों में जल संकट महसूस किया जाने लगा है।
चना तथा गेहूं की फसलों की लगातार सिंचाई से नदियों का जलस्तर घट गया है। बेतवा और उसकी सहायक नदियां सूखती जा रही हैं। इन दिनों केवटन, सिंध नदी से सैकड़ों पंप और पंखियां पानी खींच कर खेतों तक पहुंचा रही हैं। इसके चलते केवटन, सिंध नदियां सूख रही हैं। जल स्त्रोतों का पानी घटने से जमीनी जल स्तर भी तेजी से गिर रहा है।
पठार क्षेत्र के 50 गांवों में कई हैंड़पंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। पीएचई के सामने हैंड़पंपों में पाइप डालने की समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट खड़ा हो रहा है। नदियों से चल रही सिंचाई पर प्रशासन लगाम लगाने की दिशा में कदम नहीं उठा रहा है। इससे आने वाले दिनों में जमीनी जल स्तर और भी घट सकता है।
50 गांवों में एक- एक दो- दो हैंडपंप प्रभावित
ऐसेगांव जहां जमीनी वाटर लेबल 120 से 150 फीट था हैंड पंप में पड़ी लाइनें उससे पानी उठा रही थी। वहां जल स्तर घटने से दो से तीन पाइप राइजिंग लाइन में बढ़ाना पड़ रहे हैं। ऐसी समस्या घटेरा, गमाखर, चौरावर और लाल पठार में रही है। ग्राम लेहदरा में २०० फीट नीचे पानी चला गया है। वहां पहले से ही लाइनें ओवर लोड हैं। अतिरिक्त लाइनें समस्या खड़ी कर रही हैं।
कार्रवाई नहीं हुई तो गहरा सकता है संकट
नदियोंके सूखने के बाद भी प्रशासन इस दिशा में अब तक सजग नहीं हुआ है। इसके चलते भविष्य में पशुओं के समक्ष पानी का संकट सकता है। इसके अतिरिक्त बेतवा नदी का जल स्तर गिरने से नगर में होने वाली जल सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। बेतवा से नगर के लिए प्रतिदिन 10 लाख लीटर पानी लेना पड़ता है।
तीन से पांच इंच के पाइपों का हो रहा उपयोग
खेतोंमें फसलों की सिंचाई के लिए किसान पांच से लेकर पचास हार्स पॉवर के पंपों का उपयोग कर रहे हैं। एक- एक किलो मीटर दूर तक तीन इंच से लेकर पांच इंच के पाइपों से पानी खेतों तक ले जाया जा रहा हैं। इसके चलते नदियां तेजी से खाली हो गई है। अब हा