निष्काम भक्ति से ही मिलते हैं भगवान
कार्यालय संवाददाता| गंजबासौदा
भगवान को यदि पाना है तो हमें निष्काम भक्ति करना चाहिए। निष्काम भक्ति का आशय है कि भगवान से कुछ इच्छा रखना। धन, संपत्ति, भौतिक वस्तु कुछ भी नही। यदि हम भक्ति में कोई कामना रखते हैं तब ठाकुर जी हमें वो वस्तु देते तो हंै लेकिन हमसे प्रेम नहीं रखते हैं, हम पर प्रसन्न नही होते हैं। यह बात ग्राम मूडऱा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित तरुण महाराज ने कही।
उन्होंने कहा कि भक्ति का अर्थ है भगवान से हम एक मिनट भी विभक्त हो ऐसी भक्ति करना चाहिए। विपत्ति में ही भगवान याद आए तो उसे भक्ति नहीं कहा जा सकता। निष्काम भक्ति के आचार्य थे सुदामा जी महाराज। कभी भगवान से वे कुछ नहीं मांगते थे। इसलिए जीवन में निष्काम भक्ति ही अपनाना चाहिए।