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नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की

5 वर्ष पहले
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गंजबासौदा| अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए भगवान श्रीहरि हर युग में अवतार लेते हैं। साधु-संतों और गोरक्षा के लिए परमात्मा को साकार होना ही पड़ता है। बेहलोट देव नगरी के अन्नपूर्णा मंदिर प्रांगण में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन पंडित राकेश पाठक ने उक्त उद्गार व्यक्त किए। श्री पाठक ने कहा कि द्वापर युग में कंस के अत्याचारों से जब धरती पर अधर्म अत्याचार बढ़े तो धरती कांपने लगी। तब श्री हरि नारायण वासुदेव देवकी पर कृपा कर अधर्म के विनाश के लिए अवतरित हुए। भादौ के महीने में जब श्री हरि भगवान कृष्ण के रूप में धरती पर अवतरित हुए उनके अवतार के साथ ही अधर्म रूपी कारागार के द्वार अपने आप खुल गए।

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