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भवनों की भेंट चढ़े मैदान

7 वर्ष पहले
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स्कूलाेंमें अतिरिक्त कक्षों के निर्माण से खेल मैदान खत्म होते जा रहे हैं। हाल ही में उत्कृष्ट विद्यालय में अतिरिक्त कक्षों के निर्माण की स्वीकृति मिली है। समस्या यह कि ये कक्ष बनाएं कहां। स्कूल के मैदान पहले से निर्माण के कारण आधा हो चुका है।

नगर में माध्यमिक विद्यालय के अलावा किसी भी स्कूल में अच्छा खेल मैदान नहीं है। नए भवनों की स्वीकृति के कारण विभाग एवं संस्था प्रधान भी परेशान हैं। नए कक्षों की जो स्वीकृति आई, उसके लिए जगह नहीं हैं। ऐसे में निर्माण कहां करें। अगर खेल मैदान में निर्माण होगा तो विद्यार्थियों को परेशानी होगी। जो मैदान हैं, उनका भी रख-रखाव नहीं हो रहा। इससे खेल गतिविधियां कम हो रही है।

परेडग्राउंड से चलता है काम

नगरके उत्कृष्ट विद्यालय का खेल मैदान नहीं है। स्कूल परिसर में जो जमीन है, उस पर भी पौधारोपण कर दिया। कुछ जगह पहले ही भवन के कारण खत्म हो गई। ऐसे में यहां के खिलाड़ी या तो परैड ग्राउंड में खेलते हैं या बालक माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान पर।

शासन से मांग करेंगे

^हांये सही है कि स्कूलों में मैदान नहीं हैं। ऐसे में जो अतिरिक्त कक्ष रहे हैं, वे भी स्कूल के मैदान में ही बन रहे हैं। मैदान के लिए शासन से मांग की जाएगी। खेल शिक्षकों को भी निर्देशित किया जाएगा। बीकेर|ावत, बीईओ

भानपुरा में भी है संकट

भानपुराके उत्कृष्ट विद्यालय का मैदान पूरी तरह निर्माण की गिरफ्त में गया है। यहां के कन्या हायर सेकंडरी में भी निर्माण कार्याें के चलते मैदान खत्म हो गया है। शामगढ़ के कन्या हायर सेकंडरी स्कूल में भी मैदान का अभाव है।

पांच साल में केवल एक खिलाड़ी

पांचसाल में यहां से स्कूलस्तर पर केवल एक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा। राज्यस्तर की बात करें तो यह आंकड़ा केवल चार से पांच खिलाड़ियों का है। पूरे विकासखंड में करीब दो सौ माध्यमिक, हायर सेकंडरी एवं हाईस्कूल हैं। इनमें करीब 2500 से अधिक विद्यार्थी। बादजूद खिलाड़ियों की संख्या इतनी कम है। इसकी बड़ी वजह स्कूलों में मैदान होना है।

यहां भी मैदान खत्म

तीनसाल पहले शासकीय कन्या हायर सेकंडरी स्कूल में अच्छा मैदान था। यहां कन्या माध्यमिक विद्यालय का अतिरिक्त भवन बना दिया। इससे मैदान की जगह कम हो गई। इससे पहले मैदान को जैविक उद्यान के नाम पर कम कर दिया था। हालात यह है कि कन्या हायर सेकंडरी स्कूल