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बांध के डूब क्षेत्र में इस बार भी खाली नहीं होगी पूरी जमीन

7 वर्ष पहले
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{किसानों को जमीन खाली होने का इंतजार

भास्करसंवाददाता | गरोठ

इसबार भी डूब क्षेत्र में पूरी जमीन खाली नहीं होगी। किसानों को खोती के लिए पूरी जमीन नहीं मिल पाएगी। जो जमीन खाली हुई, उस पर खेती करने वाले किसानों के आवेदन भी कम ही रहे हैं। हालांकि बांध में पिछले साल की तुलना में पानी कम होने के कारण इस बार ज्यादा जमीन खाली होगी।

जल संसाधन विभाग के गरोठ सब डिविजन में चार हजार एकड़ जमीन डूब क्षेत्र में है। यहां पानी कम होने पर हर साल खेती होती है। हर साल इसके लिए किसान आवेदन करते हैं। पिछले दो साल से बहुत कम जमीन खाली हो रही है। इससे किसानों को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा।

इसलिएलेते हैं डूब की जमीन

डूबकी जमीन अधिक उपजाऊ होती है। साथ ही नमी बरकरार रहने के कारण यहां पानी भी आवश्यकता भी कम रहती है। इसलिए यहां किसान तीसरी फसल का उत्पादन कर अतिरिक्त फायदा कमाते हैं। डूब की जमीन लीज पर लेने वालों की हर साल लाइन लगती है। पिछले दो साल से यह सिलसिला थमा हुआ है। इस बार भी कम ही आवेदन आए हैं।

पांच हल्कों में केवल 150 आवेदन

जलसंसाधन विभाग ने डूब क्षेत्र को पांच हल्कों में बांटा है। इसमें बंजारी, चचावदा पठारी, कंवला, बालोदाउ और खड़ावदा। इनसे करीब 150 आवेदन आए हैं। हालांकि संख्या बढ़ भी सकती है। आवेदन नवंबर तक लिए जाएंगे। नवंबर के बाद ही यहां फसलों की बुआई होगी। पिछले साल पानी की अधिकता की वजह से केवल 970 हेक्टेयर में ही खेती हो पाई थी। इस बार विभाग करीब 2200 हेक्टेयर जमीन पानी से बाहर आने की संभावना व्यक्त कर रहा है।

एक नजर

कुलजमीन- 4000 हक्टेयर

वर्ष 2013-14 में खाली हुई थी- 970 हेक्टेयर

2014-15 में संभावना - करीब 2200 हेक्टेयर

आवेदन तो कम ही रहे हैं

^आवेदनतो कम ही रहे हैं। वैसे बारिश की कमी के कारण पिछले साल की तुलना में इस साल जमीन अधिक बाहर आने की संभावना है। बावजूद किसानों का रुझान कम है। एकेशर्मा, एसडीओजल संसाधन विभाग

किसानों को है इंतजार

किसानोंको डूब की जमीन खुलने का बेसब्री से इंतजार है। खड़ावदा के किसान इंदरसिंह गौड़, मनोज पाटीदार ने बताया अगर जमीन पानी से बाहर आती है तो किसानों को अतिरिक्त फायदा मिल सकता है। यहां मेहनत भी कम लगेगी।

गांधीसागर के डूब क्षेत्र में भरा पानी। फोटाे भास्कर