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जलवायु बेहतर मिट्टी फिर भी उगाया सागवान का बाग
कृषि क्षेत्र में बदलाव करते हुए गरोठ के किसान ने सागवान के पेड़ उगाए।
प्रशांतयादव | गरोठ
जलवायुमिट्टी उपयुक्त नहीं होने के बावजूद उन्होंने खेत में 200 से अधिक सागवान के पौधे सहेज रखे हैं। अाठ साल से इन पौधों पर मेहनत की जा रही है।
यह किसान हैं नगर के महेंद्र पिता सुरेशचंद्र अग्रवाल। इनके शामगढ़ रोड स्थित दो बीघे खेत में दो सौ से अधिक सागवान के पेड़ इनकी मेहनत की कहानी बता रहे हैं। हालांकि अभी और करीब 20 साल ये पेड़ इमारती लकड़ी के काम नहीं सकते बावजूद इसके उन्होंने इनको सहेजा और बड़ा कर मिसाल कायम की। महेंद्र कहते हैं बारिश के अलावा यदि जरूरत पड़ती है तो सिंचाई करते हैं।
इसलिएमहत्वपूर्ण है सागवान -सागवान कीलकड़ी सबसे अधिक महत्वपूर्ण एवं श्रेष्ठ इमारती लकड़ी है। यह मजबूत एवं टिकाऊ होती है। दिन दिन इसकी चमक बढ़ती है। साथ ही दीमक से यह प्रभावित नहीं होती। यही कारण है कि यह सबसे अधिक महंगी है।
सागवान के लिए उपयुक्त जलवायु नहीं होने के कारण किसान इससे कतराते हैं। सागवान का पौधे को पेड़ बनने में 30 से 40 साल लग जाता है। इससे किसान इस तरफ उदासीन रहते हैं। बहरहाल यदि इस पर मेहनत कर ली जाए तो यह काफी फायदे की खेती साबित हो सकती है। कृषि एवं वन विभाग के अधिकारियों की माने तो भले ही यहां की जलवायु इस लायक नहीं हो लेकिन समय-समय पर सिंचाई कर ली जाए तो उत्पादन किया जा सकता है।
सिंचाई की जरूरत ज्यादा
पानी वाले क्षेत्रों में लगाएं
^पानीवाले क्षेत्रों में किसान सागवान के पौधे लगा सकते हैं। हालांकि यहां की मिट्टी और जलवायु सागवान के पेड़ों के लायक नहीं है। फिर प्रयास करने पर किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं। दिनेशकुमार भाना, वरिष्ठकृषि विस्तार अधिकारी
फैक्ट फाइल
सागवानका पेड़ बनता 30से 40 साल में
वर्तमानभाव करीब1000 से 1200 रु. घन फीट
शामगढ़ रोड पर महेंद्र अग्रवाल के खेत पर लगे सागवान के पेड़।
वन विभाग ने भी लगाए
^यहां का जलवायु उपयुक्त नहीं होने के कारण सागवान की ग्रोथ बहुत धीमी है। वन विभाग ने यहां पौधे लगाए हैं। इसके अलावा कुछ किसानों ने भी छूट पुट सागवान के पौधे लगा रखे हैं। प्रतापलालगेहलोद, डिप्टीरेंजर, वन विभाग
महेंद्र अग्रवाल