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स्क्रब थाईफिशियर की चपेट में तीन किसान

7 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता. गरोठ/भानपुरा

क्षेत्र में नए बुखार ने दस्तक दी है। इसने तीन किसानों को चपेट में ले लिया है। दो का कोटा और एक का भवानीमंडी में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों का कहना है ये स्क्रब थाईफिशियर से पीड़ित हैं।

भैंसोदा का सलीम पिता सुल्तान (42) 15 दिन से स्क्रब थाईफिशियर बुखार से पीड़ित है। उसका कोटा में इलाज चल रहा है। भैंसाेदा का ही युनूस मोहम्मद पिता हुसैन मोहम्मद 43 दस दिन से इसी बीमारी से पीड़ित है। उसका भवानीमंडी के ही एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। गरोठ के चांदखेड़ी निवासी सूरतसिंह 17 भी इसी बुखार से पीड़ित है। वह चार दिन से कोटा में भर्ती है।

ऐसेहोता है यह बुखार - डॉक्टरोंके अनुसार यह बुखार जंगल और खेतों में काम करने वालों को एक विशेष प्रकार का कीड़े काटने पर आता है। कीड़े के काटने के बाद एक निशान हो जाता है। प्रभावित को सामान्य बुखार की तरह ही बुखार आता है। इसके बाद मरीज का ब्लड प्रेशर कम होने लगता है। जोड़ों में दर्द होता है। यदि समय पर ईलाज मिले तो पेट में पानी भी भर सकता है।

यहबरतें सावधानियां - कीड़ोंसे सावधान रहें। जंगल में सावधानी ज्यादा जरूरी है। यदि लक्षण नजर आए तो तुरंत जांच करवाएं।

भानपुरा क्षेत्र में ऐसे कई संवेदनशील क्षेत्र पठार क्षेत्र में है। यहां 2011 में मलेरिया से मौत भी हो गई थी। यहां मच्छरों से बचाव की दिशा में अब भी कोई इंतजाम नहीं हुए। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सर्वे करने जांच की बात कह रहे हैं।

मुझेजानकारी नहीं

^येबुखार संक्रामक नहीं है, इसका उपचार भी आसानी से संभव है। हमारे पास इस तरह का कोई मरीज अब तक नहीं आया। इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। डॉ.बीएल सिसौदिया, बीएमओभानपुरा

उपचारमें बरतें कोताही

^वैसे तो यह आम बुखार की तरह ही है लेकिन यदि प्रारंभिक उपचार में कोताही बरती जाए तो परिणाम खतरनाक हो सकते हैं। हालांकि जान का खतरा कम ही रहता है, लेकिन मरीज को गंभीर नुकसान हो सकते हैं। डॉ.राजेंद्र अग्रवाल, संचालक,सुधा हॉस्पिटल कोटा

कोई इंतजाम नहीं