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प्रदेश सरकार भले ही न बनाएं ये तो गरोठ को जिला ही मानते हैं

5 वर्ष पहले
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गरोठ को जिला बनाने के प्रयास 20 साल से चल रहे हैं। सरकार ने अभी तक इसे जिला नहीं बनाया, लेकिन कुछ सामाजिक एवं व्यापारिक संगठन इसे जिला ही मान रहे हैं। बाकायदा जिलाध्यक्ष भी नियुक्ति कर जिम्मेदारी दी जा रही है। पाटीदार समाज भी क्षेत्र में जिलाध्यक्ष बनाने की तैयारी कर रहा है। अघोषित गरोठ जिले की सीमा सुवासरा से गांधीसागर तक है। अब तक छह संगठन इसमें शामिल थे।

स्थानीय लोग कर चुके आंदोलन-गरोठ को जिला बनाने की मांग दशकों पुरानी है। अब लोग इस पर समय खराब करने की बजाए विकल्प के रूप में संगठनों में नियुक्तियां कर गरोठ को जिला बनाने का सपना पूरा कर रहे हैं। 1992 में इसे लेकर यहां वृहद रूप से आंदोलन हुआ था। 15 दिन तक तनाव की स्थिति रही। बड़ी संख्या में बल तैनात रहा। कर्फ्यू लगा रहा। हालांकि इस आंदोलन के नाम शहर के एक चौराहे का शहीद चौक है।

प्रशासन ने भी की औपचारिक तैयारी -प्रशासनिक स्तर पर इसे जिला बनाने की औपचारिक रूप से तैयारी कर दी है। पिछले दिनों यहां एडीएम और एएसपी की नियुक्ति कर दी गई। हालांकि अब केवल घोषणा बाकी है।

ये हैं संगठनों की ताकत

25000
भारतीय किसान संघ

10000 विहिप बजरंग दल

90000 पाटीदार समाज

70000 राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ

इनके लिए है गरोठ जिला

1.
राष्ट्रीय स्वयं सेेवक संघ

2. विश्व हिंदू परिषद

3. भारतीय किसान संघ

4. ग्राम भारती शिक्षण समिति

5. बजरंग दल

6. बीज एवं खाद व्यापारी संघ

7. पाटीदार समाज

अघोषित गरोठ जिले की सीमा
गरोठ की सीमा सुवासरा से गांधीसागर मानी जाती है। सुवासरा क्षेत्र के बसई के पास बनी चंबल पुलिया से गांधीसागर में बनी पुलिया है। इसमें चार तहसीलें , पांच थाने, चार चौकियां सहित करीब 375 गांव हैं।

4 तहसीलों में शामिल हैं गांव

तहसील गांव
गरोठ 107

शामगढ़ 97

भानपुरा 96

सुवासरा 75

कुल 375

गरोठ काे जिला मानने के ये है प्रमुख कारण
खाद एवं बीज व्यापारी संघ के गरोठ जिला अध्यक्ष राजेश सेठिया का कहना है जिला काफी बड़ा हो जाता है। ऐसे में यदि कोई जिला स्तरीय बैठक की जाए तो लोगों को काफी लंबा चलना पड़ता है।

पाटीदार समाज के तहसील अध्यक्ष तुलसीराम पाटीदार की माने तो जिले में काफी गांव हैं। ऐसे में जिलाध्यक्ष के लिए पूरे जिले पर ध्यान देना संभव नहीं हो पाता है।

गरोठ शहर का अस्पताल चौराहा। फोटो-भास्कर

गरोठ क्षेत्र की ये है व्यावसायिक स्थिति
गरोठ- तहसील मुख्यालय पर पांच टू व्हीलर शोरूम हैं और एक ट्रैक्टर का शोरूम हैं। वाहन के अलावा सोना चांदी, किराना, कपड़ा आदि मिलाकर शहर का सीजन का मासिक व्यवसाय 30 करोड़ रुपए है।

भानपुरा- तहसील मुख्यालय पर पांच टू व्हीलर के शोरूम हैं, दो ट्रैक्टर के शोरूम हैं। तहसील का पूरे बाजार का कारोबार 35 करोड़ रुपए मासिक है।

शामगढ़- यहां टू व्हीलर के पांच, कार के दो और ट्रैक्टर के पांच शोरूम है। तहसील का मासिक व्यवसाय करीब 70 करोड़ रुपए है।

सुवासरा- यहां टू व्हीलर के चार और एक ट्रैक्टर शो रूम है। तहसील का मासिक बिजनेस करीब 30 करोड़ रुपए हैं।

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