धनिये से हो रहा मोह भंग
धनियेकी फसल से किसानों का माेह भंग हो गया। मौसम की मार से परेशान किसानों ने धनिये की फसल की बोवनी कम कर दी है। सरकारी आंकड़ों में रकबे में कमी आई है। किसान इसका कारण मौसम में हो रहे दिनोंदिन परिवर्तन को बता रहे हैं। इस पर भी पिछले साल बड़ी संख्या में धनिये की फसल पाला ग्रस्त हो गई।
धनिया महंगी मसाला फसलों में से एक है। इस क्षेत्र में बड़ी मात्रा में धनिये की फसल का उत्पादन होता है। इस साल किसानों ने इससे तौबा कर ली है। रकबा कम हुआ और किसान इस फसल की ओर से धीरे धीरे मुंह मोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि पिछले साल और इस साल में धनिये की फसल में 1500 हेक्टेयर फसल की कमी है।
कम तो हुआ है रकबा
^धनिएके प्रति किसानों का मोह भंग हुआ है। रकबा कम हुआ है। किसानों को प्रेरित किया था लेकिन मौसम की वजह से किसानों ने इस बार रिस्क नहीं ली। अनूपसोनी, उद्यानअ, भानपुरा
नहींमोड़ पाई
^धनिएकी फसल के लिए किसानों को बीमा योजना बताई थी, लेकिन फिर भी धनिए का रकबा नहीं बढ़ाया जा सका। बीमा योजना भी किसानों के डर को नहीं पीकेमोड़, उद्यानअधीक्षक, गरोठ
इसलिए बनाई दूरी
ठंडमें धनिये को ज्यादा नुकसान होता है। फसल को पाला लग जाता है। उदाहरण के तौर पर पिछले साल तीन बार ओले गिरे और ठंड में पाले की तो कोई गिनती ही नहीं। किसानों के खेत के खेत बर्बाद हो गए।
बीमाका लाभ नहीं
उद्यानिकीविभाग के अनुसार रबी के लिए फसल बीमा की व्यवस्था है। किसान सारा लोन खरीफ के समय ले लेते हैं। इससे रबी की फसल के लिए उनकी प्रीमियम जमा नहीं हो पाती। इस स्थिति में किसानों को फसल बीमा का लाभ नहीं मिल पाता।
बार-बार नुकसान बर्दाश्त नहीं
^किसानफसलों की बुआई करे और मौसम के कारण उसे नुकसान उठाना पड़े तो तकलीफ होती है। नुकसान की भरपाई का और कोई रास्ता नहीं है। ऐसे में सोच समझकर खेती करना ही मुनासिब है इसलिए धनिए को कम ही रखा। महेशपंडित, किसानदशोरिया
जितनाजरूरत था उतनी की बुआई
^धनियेका भाव भले ठीक रहता है लेकिन बार बार नुकसान भी इसका होता है। इसलिए इस बार जितनी जरूरत थी उतनी ही बुआई की। श्यामकोटवाल, किसानगरोठ
फैक्ट फाइल
विकासखंडकुल रकबा धनिए का रकबा पिछले साल
गरोठ55 हजार हेक्टेयर 8 हजार हेक्टेयर 9000
भानपुरा 35 हजार हेक्टेयर 8500 हैक्टेयर 9000