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गलती दिखी तो लिख देते हैं पोस्टकार्ड

7 वर्ष पहले
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हिंदी की लिखावट में उन्हें गलती दिखी तो वे संबंधित व्यक्ति को पोस्टकार्ड लिख देते हैं। भाषा सुधारने का आग्रह करते हैं। अब तक वे 100 से अधिक पोस्टकार्ड वे लिख चुके हैं।

राष्ट्र भाषा हिंदी के प्रति ऐसी दीवानगी है पूर्व शिक्षक राधेश्याम मिश्रा की। वे 15 साल पहले शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हो चुके लेकिन हिंदी को बढ़ावा देने का काम आज भी जारी है। वे स्थानीय प्रादेशिक अखबारों को भी पत्र लिखकर गलतियां सुधारने का आग्रह करते हैं।

पत्रआया तो हुआ गलती का एहसास- हमेंनहीं पता था कि गलती हुई। जब सर का पत्र आया तो गलती का एहसास हुआ। उसे सुधारा भी। यह कहना है दवा व्यवसायी केके भट्ट का। नगर के मेडिकल स्टोर पर दवाइयां शब्द गलत लिखा था। इसके लिए उन्होंने सभी दुकानदारों को पत्र लिखा था। एक निजी चिकित्सालय का नाम भी गलत होने पर संचालक को सुधार के लिए पत्र लिखा था।

लिख दी किताबें

बीएडकॉलेज प्राचार्य डॉ. निशा महाराणा का हिंदी से ऐसा लगाव है कि उन्होंने कहानियों कविताओं की किताबें लिख दी। हाल ही में उन्होंने जागती आंखों का सपना किताब लिखी है। इसके साथ ही बीएड के विद्यार्थियों के लिए पर्यावण शिक्षा जागरूकता हिंदी भाषा में ही लिखी है। डॉ. महाराणा एमएससी बाटनी, एलएलबी, एमएड पीएचडी कर चुकी है। उन्होंने बताया हिंदी से उन्हें बचपन से ही लगाव था।

हिंदी में करते हैं हस्ताक्षर

जिलाशिक्षाधिकारी के.सी. शर्मा के हस्ताक्षर की उनकी पहचान है। 1985 में शिक्षक के रूप में शुरुआत करने वाले शर्मा हिंदी से बेहद लगाव रखते हैं। उन्होंने एमएससी इंग्लिश से की। वे केमेस्ट्री के शिक्षक रहे। लेकिन उनके सभी निर्देश हिंदी में ही रहते हैं। हस्ताक्षर भी हिंदी में ही करते हैं। उनका कहना है हिंदी हमारी मातृभाषा है इसलिए बोलने, पढ़ने, लिखने में इसी का प्रयोग करना चाहिए। भाषा के लिए इससे बढ़ा सम्मान और कोई नहीं हो सकता।

बच्चों को देते हैं नि:शुल्क ज्ञान

मिश्राहिंदी को बढ़ावा देने के लिए घर पर ही बच्चों काे नि:शुल्क ज्ञान देते हैं। हालांकि कुछ दिनों से अस्वस्थ होने के कारण वे क्लास नहीं ले पा रहे हैं। हिंदी पर कठिनाई हाेने पर बच्चे उनसे पूछने जाते हैं तो वे उनकी समस्या का समाधान जरूर करते हैं। साथ ही पूरे परिवार मोहल्ले में हिंदी में यदि किसी को दिक्कत होती है तो उसका समाधान करते हैं।

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