कितना खाद दंे नहीं पता
किसानों को यह नहीं पता कि उनके खेत में जो मिट्टी है उसकी उर्वरा शक्ति कितनी है। उसमें कौन-कौन सा और कितना कितना फर्टीलाइजर चाहिए। ऐसे में किसान जानकारी के हिसाब से यूरिया डाल रहा है। इसे हासिल करने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। तो खेतों को इतना यूरिया चाहिए और इसके लिए जद्दोजहद की जरूरत है।
यहहै किसानों की परेशानी-गरोठ केश्याम कोटवाल का कहना है कृषि विभाग ने कभी कोई ध्यान नहीं दिया और कभी किसानों को जागरूक किया। मिट्टी परीक्षण की जानकारी अगर समय पर मिल जाए तो किसान पहल कर सकता है। खाद नहीं दे पा रहे हैं तो अधिकारी हमें जिम्मेदार बता रहे हैं। दशोरिया के महेश पंडित ने कहा हम अपनी मर्जी से खाद का उपयोग करते हैं। हमारी जरूरत एक हेक्टेयर में 9 से 10 बेग रहती है। हमें मिल तीन ही पाता है। इसके साथ किसानों ने एक और बात का खुलासा किया कि कभी भी कृषि विभाग से कोई कर्मचारी या अधिकारी यह बताने नहीं आया कि हमें कितना फर्टीलाइजर उपयोग करना है।
दसफीसदी की मिट्टी का भी परीक्षण नहीं-गरोठ एवंभानपुरा विकासखंड की बात करें तो साल में पांच फीसदी किसानों की मिट्टी परीक्षण भी नहीं किया जा सका है। ऐसे में स्पष्ट है किसानों को खेत की मिट्टी के बारे में जानकारी है और उसमें उपयोग किए जाने वाले फर्टीलाइजर की। ऐसे में किसान एक दूसरे को देखकर या से यूरिया तथा अन्य फर्टीलाइजर का इस्तेमाल कर रहा है।
अनावश्यक करते हैं उपयोग
जिंक सल्फर कम
एक नजर
^किसान फर्टीलाइजर और खासकर यूरिया का अनावश्यक उपयोग करते हैं। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। विभाग के कर्मचारी समय समय पर जानकारी देने जाते हैं। मिट्टी परीक्षण हमने मिले लक्ष्य के आधार पर ही किया है। दिनेशकुमार भाना, कृषिविस्तार अधिकारी
क्षेत्र में कुल किसान परिवार करीब70 हजार
गरोठविकासखंड करीब45 हजार
भानपुराविकासखंड करीब25 हजार
मिट्टीपरीक्षण भानपुरा में 1200किसान
मिट्टीपरीक्षण गरोठ में 1500किसान
कुलपरीक्षण 2700किसान
जमीन में मुख्य तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश है। ये तत्व क्षेत्र की मिट्टी में हैं। कहीं कहीं इनकी कमी जो रासायनिक खाद से पूरी हो जाती है। इस क्षेत्र सहित जिलेभर की मिट्टी में सबसे अधिक कमी जिंक की है। किसानों को इस दिशा में अधिक सोचना चाहिए। यह कहना है कृषि विस्तार अधिकारी का। उन्होंने कहा यदि किसानों को कुछ समझ न