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40 से अधिक बिना मुंडेर के कुएं शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं

5 वर्ष पहले
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बिना मुंडेर के कुओं से बनी रहती है हादसे की आशंका, जिम्मेदार बरत रहे लापरवाही

भास्कर संवाददाता | गोहद

गोहद क्षेत्र के 40 से अधिक गांवों में बने कुओं के आसपास मुंडेर नहीं बनी है। जबकि इन कुओं को चिन्हित कर इनके पास मुंडेर बनाए जाने के लिए कई बार जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा आश्वासन दिए जा चुके हैं। इसके बाद भी आज दिन तक इस दिशा की ओर कोई प्रयास शुरू नहीं किए गए हैं। कई बार पानी की तलाश में भटकते हुए जानवर भी इनमें गिर जाते हैं। साथ ही बारिश में इनमें पानी भर जाने से राहगीर को यह नजर नहीं आते हैं, जिस कारण हादसा होने की आशंका बनी रहती है।

जनप्रतिनिधियों को भी बताया पर समस्या नहीं सुलझी: गंगादास का पुरा, चिनकूपुरा, धमसा, बड़ाघर, झाबलपुरा, कठवांहाजी, खरुआ, खनैता, छरैंटा, एनों, एंडोरी, बकनासा सहित क्षेत्र के 40 से अधिक गांव ऐसे हैं जिनमें बिना मुंडेर के कुएं हर दिन हादसे को न्यौता दे रह हैं। इस समस्या का निराकरण कराए जाने के लिए कई बार ग्रामीणों द्वारा जनप्रतिनिधियों से लेकर संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से कई साल से गुहार लगाई जा रही है। इसके बाद भी इन जगहों की स्थिति में कोई सुधार होता हुआ नजर नहीं आ रहा है।

सार्वजनिक स्थानों पर भी खतरा लेकिन नहीं दिया जा रहा ध्यान : कौशल पराशर निवासी बड़ाघर, राजकुमार शास्त्री खनैता सहित अन्य का कहना है कि गांव में नहीं बल्कि क्षेत्र में भी कई कुएं ऐसे हैं। जिनकी मुंडेर या तो टूट गई है या बिना मुंडेर के ही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण इन जगहों पर कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है।

बारिश में बढ़ जाता है खतरा: बारिश में बिना मुंडेर के कुओं में पानी भर जाने से यह दिखाई नहीं पड़ते हैं, जिसको लेकर ग्रामीणों के मन में भय बना रहता है।

मुंडेर बनने से हादसों में कमी आएगी, होगी सुरक्षा

बिना मुंडेर के कुओं की मुंडेर बनने के बाद हादसों में कमी आएगी। जंगली जानवर या मवेशी भी इन कुओं में नहीं गिरेंगे। मुंडेर ऊंची होने से छोटे बच्चों के गिरने की आशंकाएं भी खत्म हो जाएंगी। लोग कांक्रीट युक्त मुंडेर बना सकते हैं। गोलानुमा लोहे की जाली बनाकर उसे भी लगा सकते हैं।

बजट नहीं आया है
इन कुओं का जीर्णोद्धार कराए जाने के लिए चार साल से कोई बजट नहीं आया है। इस समस्या का निराकरण कराए जाने के लिए विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों को भी अवगत कराया जाएगा। डीएन जाटव, प्रभारी एसडीओ पीएचई विभाग

गोहद खरुआ गांव में स्थित कुएं के पास मेढ़ न होने के कारण रहता है खतरा।

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