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काउंसलिंग : अध्यापकों में नाराजगी

7 वर्ष पहले
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अध्यापकोंकी पदोन्नति के लिए अपनाई गई काउंसलिंग प्रक्रिया से एक अध्यापक को बाहर किए जाने पर शिक्षा संगठन भड़क गए। इस वजह से मंगलवार देर रात तक विवाद चलता रहा। काउंसलिंग के लिए बनाई समिति ने अपने फैसले को सही बताया।

शिक्षा विभाग ने अध्यापक को पदोन्नत के लिए मंगलवार काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की। कुल 49 पद रिक्त थे। इसके लिए 45 लोगों को बुलाया गया था। इसकी सूची भी चस्पा की गई थी। इसने से 38 अध्यापकों ने पदोन्नत के लिए अपनी सहमति जताई। जबकि 7 अध्यापकों को अपनी मनपसंद जगह मिलने से उन्होंने तरक्की ठुकरा दी। इसी बीच देर शाम अध्यापक सतीष उरैया को इस प्रक्रिया के लिए अयोग्य बता दिया गया। जबकि सूची में उनका नाम था। इस बात को लेकर आजाद अध्यापक महासंघ, राज्य अध्यापक संघ एवं अजाक्स ने नाराजगी जताई। सभी संगठन शिक्षा विभाग पहुंच गए। उन्होंने अध्यापक को बाहर किए जाने पर अपनी नाराजगी जताई। इस वजह से देर रात तक काउंसलिंग समिति और संगठन के बीच कहासुनी चलती रही।

समितिने कहा नियम का पालन हुआ

डीईओने संगठन से कहा कि नियमों के तहत सब कुछ किया गया है। उन्होंने बताया कि सतीष उरैया का वर्ष 2011 में निलंबन हुआ था। इसके बाद वह बहाल हो गए थे। लेकिन उनकी निलंबन अवधि का निराकरण नहीं हुआ था। समिति के सामने इसकी शिकायत प्राप्त हुई थी। इसलिए उन्हें प्रक्रिया से बाहर किया।

मुख्यालय पर रुके

संगठनने जब डीईओ पर दबाव बनाया तो उन्होंने कहा कि हमेशा आपकी बात मानी जाती है। लेकिन संगठन को भी शिक्षा की बेहतरी के लिए आगे आना चाहिए। डीईओ अजय कटियार ने कहा कि संगठन यह भी जिम्मेदारी ले कि सभी शिक्षक मुख्यालय पर रुके। क्योंकि इस तरह के आदेश शासन के हैं।