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सीआर के इंतजार में अटकी क्रमोन्नति पदोन्नति
सहायकअध्यापकों की क्रमोन्नति और पदोन्नति की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए आजाद अध्यापक संघ ने जिला पंचायत सीईओ को ज्ञापन दिया है। संगठन का कहना है कि पात्र अध्यापकों की सीआर भेजे जाने की वजह से पूरी प्रक्रिया अटकी पड़ी है।
संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि सहायक अध्यापकों की पदोन्नति की प्रक्रिया मई में ही आरंभ हो चुकी है। 13 मई को शिक्षा विभाग ने पदक्रम सूची जारी कर दावे आपत्ति मंगवाए थे। तब से करीब सात माह गुजर गए हैं, लेकिन स्थिति जहां की तहां है। जबकि राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने 5 जून 2014 प्रमोशन करने के आदेश दिए थे। यही नहीं 2001 की नियुक्ति वाले अध्यापकों को दो साल गुजर जाने के बावजूद प्रथम क्रमोन्नति का लाभ नहीं दिया जा रहा है। इसकी वजह यह है कि संबंधित वेतन केंद्रों द्वारा अध्यापकों की सीआर नहीं भेजी जा रही है। इसे लेकर जनपद पंचायत द्वारा बार-बार पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन काम को लगातार अटकाया जा रहा है। संगठन के नरेंद्र भारद्वाज, संतोष श्रीवास्तव, राजमणि दुबे आदि का कहना है कि अगर जल्द ही यह मसला नहीं सुलझता है तो संगठन आंदोलन करेगा।
अन्यसंगठन भी उठा चुके हैं मुद्दा : क्रमोन्नतप्रमोशन का मुद्दा अन्य संगठन भी उठा चुके हैं। शिक्षक संघ और राज्य अध्यापक संघ की ओर से भी हाल ही में शिक्षा विभाग को ज्ञापन दिया जा चुका है।
संगठन ने उठाई यह मांगे
{ प्रमोशन, क्रमोन्नति, पदक्रम सूची, अतिशेष, युक्तियुक्तकरण शालाओं में रिक्त पदों की सूची आदि सभी जानकारी पोर्टल पर जारी की जाए।
{ ई-अटेंडेंस की प्रक्रिया से अध्यापकों को मुक्त रखा जाए, क्योंकि उनके वेतन इतने नहीं कि वे महंगे एंड्रॉयड फोन खरीद सकें।
{ अध्यापकों के संविलियन की फाइल लंबे समय तक दबाकर रखी जाती हैं। इसके लिए समय सीमा तय की जाए और उस पर सख्ती से अमल भी हो।
{ अध्यापकों के प्रान नंबर एलॉट नहीं किए जा रहे हैं। िजनके प्रान नंबर हैं तो कटौत्रा नहीं हो रहा है या ज्यादा हो रहा है।
{ सेवा पुस्तिकाओं को सालों से अपडेट नहीं किया गया है। बार-बार आवेदन देने के बावजूद अभिलेख आद्यतन नहीं होता है।
{ कई स्कूल जहां सिर्फ दो शिक्षक पदस्थ हैं, उनमें से एक को बीएलओ का प्रभार दिया गया है। परिणामस्वरूप उक्त शाला एक शिक्षकीय रह जाती है।