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गजलें गाकर किया जगजीत सिंह को याद

6 वर्ष पहले
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गजलसम्राट जगजीत सिंह की जन्मतिथि मनाई गई। गजल गायक शरद सक्सेना के सोनी कॉलोनी स्थित निवास पर हुए कार्यक्रम में जगजीत सिंह की कई मशहूर गजलों को गायकों ने अपनी आवाज में दोहरा कर उन्हें याद किया। कार्यक्रम की शुरुआत जगजीत सिंह के जीवन चरित्र और उनके संगीत के क्षेत्र गजल गायकी में योगदान के बारे में आशीष सक्सेना ने बताया। सरस्वती वंदना शौमिल ने पेश की। शरद सक्सेना ने अपनी सुमधुर आवाज में जगजीत सिंह की मशहूर गजलें जैसे सीने में सुलगते हैं आरमां आंखों में उदासी छाई है, बचपन की मुहब्बत को दिल से जुदा करना, शोला हूं भड़कने की गुजारिश नहीं करता, होंठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो, हम तो हैं परदेस में देश में निकला होगा चांद आदि गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में डॉ. प्रकाश तिवारी, मनोज जैन द्वारा भी प्रस्तुतियां दी गई। हारमोनियम पर रफीक खां, तबले पर अमित द्वारा संगत की गई। इस मौके पर साहित्यकार अनिरुद्ध सिंह सेंगर, हिम्मत सिंह रघुवंशी, दिव्य पुष्प कम्ठान, डॉ. प्रीति, नेहा, संतोष पांडे आदि सहित अन्य मौजूद थे।