निर्माण में लापरवाही
प्रशासनिकउदासीनता की वजह से शहर में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। हद तो तब हो गई जब बीजी रोड पर निर्माण के दौरान सेटिंग हटने से झूल गई पुलिया को मसाला भरकर रिपेयर कर दिया। जानकार मानते हैं कि पुलिया को इस ढंग से तो कतई नहीं बनाया जा सकता है। क्योंकि यह कभी भी धराशायी हो सकती है जिससे बड़ा हादसा होने की संभावना बनी रहती है।
तकरीबन 18 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जा रहे इस आरओबी के कार्य में शुरुआती दौर से ही लापरवाही बरती जाती रही है। पहले यह ओपन फाउंडेशन के तहत बनाया जाना था उसी के लिए डिजाइन और ड्राइंग अप्रूव हुई थीं। लेकिन इसे पाइल फाउंडेशन पर बनाया गया। जिसमें पाइल बनाने में लापरवाही बरती गई। बिना ईई की मौजूदगी के पाइल भरी गईं। जिनकी गहराई की माप और कवर को लेकर सवालिया निशान लगे हैं। दूसरी तरफ सीमेंट कांक्रीट के लिए आटोमैटिक मिक्सर प्लांट की जगह लोकल मिक्सर उपयोग किए गए। अप्रूव डिजाइन को ही बदल दिया गया लेकिन ठेकेदार की ऊंची पहुंच की वजह से स्थानीय प्रशासनिक अमला चुप ही बना रहा। यही वजह है कि समय सीमा निकल जाने के कई माह बाद भी अब तक आरओबी का निर्माण पूरा नहीं हो सका है।
गुना| सर्विस लाइन से पहले पुलिया की चौड़ाई बढ़ाने के लिए काम शुरु हुआ था। इस पुलिया में झुकाव गया इसके बाद भी ठेकेदार ने निर्माण जारी रखा। -भास्कर
बाय इन्वीटेशन - इंजीनियर संजय गर्ग
पहलेतो यह पुलिया वर्षों पुरानी है। जिसे डिस्मेंटल किया जाना चाहिए था। ताकी नए सिरे से व्यवस्थित निर्माण हो सके। यदि पुराने ढांचे को रिपेयर किया जा रहा है तो इसमें देखा जाएगा कि किस तरह का और क्या केमीकल उपयोग में लिया गया है। जिससे यह िकतने समय तक टिकाऊ रह सके। सेटिंग निकालने का समय निश्चित होता है। यदि कम दिनों में सेटिंग निाकाली गई है और उसमें झुकाव आया है तो यह मामला गंभीर भी हो सकता है। इसलिए जांच के बाद ही पता चलेगा कि पुलिया की वास्तविक स्थिति क्या है। वैसे इस तरह निर्माण नहीं होना चाहिए।
अच्छे से रिपेयर करवा दी है
^बीएसएनएलकी लाइन बीच में रही थी। उन्होंने आपत्ति जताई थी। इस वजह से सेंटिंग हटाकर उनकी लाइन को अलग किया था। इस वजह से कुछ गड़बड़ी आई थी जिसे ठीक कर दिया है। पुलिया की रिपेयरिंग अच्छे से करवा दी गई है। आरएनराजपूत, सबइंजीनियर, पीडब्लूडी सेतु निगम
पुलिया