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चोरी गई बाइक का बीमा क्लेम देने के आदेश

7 वर्ष पहले
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बाइकचोरी के मामले में उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह क्लैम की राशि मय ब्याज के अदा करे।

आवेदक जगदीश पिता गैंदालाल मीना निवासी रामजानकी मंदिर की मोटर साइकल 2012 में चोरी हो गई थी। आवेदक के वकील सतीश पारीक ने बताया कि नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने इस मामले में क्लेम राशि का भुगतान करने से इंकार कर दिया। आवेदक ने कंपनी से 61 हजार 178 रुपए की क्लेम रािश अदा करने की मांग करते हुए अपना दावा पेश किया था।

कंपनीका पक्ष

कंपनीने तर्क दिया कि जिस जगह पर आवेदक द्वारा मोटर साइकल खड़ी की गई थी, वहां कोई पार्किंग स्टेंड नहीं था। इसके अलावा गाड़ी आवेदक द्वारा बाइक में ताला भी नहीं लगाया गया था। इस लापरवाही की वजह से ही बाइक चोरी हो गई। साथ ही कंपनी ने आवेदक के पास लाइसेंस होने का मुद्दा भी उठाया। जिसके आधार पर कंपनी ने मामला निरस्त करने की मांग की।

ब्याज सहित वापस लौटाएं राशि, जुर्माना भी लगाया

फोरमने बीमा कंपनी को कहा है कि वह आवेदक को 61178 रुपए 6 फीसदी ब्याज के साथ अदा करे। यह ब्याज 25 मई 2012 से लगेगा। इसके अलावा मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में एक हजार रुपए, मुकदमा खर्च के रूप में 500 रुपए अिधवक्ता शुल्क के रूप में 500 रुपए अदा करने के भी निर्देश दिए गए। बाइक चोरी के मामलों में बीमा क्लेम का यह अहम फैसला है। वर्तमान में दर्जनों लोग इस समस्या से परेशान हैं।

उपभोक्ता फोरम का फैसला

उपभोक्ताफोरम के अध्यक्ष आरके भावे एवं सदस्यों ने अपने फैसले में कहा कि आवेदक द्वारा मोटर साइकल में चाबी लगी छोड़ जाने को आधार बनाकर बीमा क्लेम को नहीं रोका जा सकता। इस संबंध में फोरम ने एक पुराने फैसले का दृष्टांत भी दिया। फोरम का कहना था कि जल्दबाजी में ऐसा हो जाता है। यह मानवीय त्रूटि है। रजिस्ट्रेशन लाइसेंस के मुद्दे पर फाेरम का तर्क था कि जिस समय वाहन चोरी हुआ, वह खड़ा हुआ था। आवेदक द्वारा उसे चलाया नहीं जा रहा था। वाहन का अस्थाई रजिस्ट्रेशन होने के आधार मात्र पर दावा निरस्त नहीं किया जा सकता। बीमा कंपनी द्वारा वाहन के पार्किंग स्टैंड पर खड़े होने के संबंध में पेश किए गए फोटोग्राफ्स को साक्ष्य के रूप में मान्य नहीं किया गया।