पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • अध्यापकों के वेतन में फंसे 1.62 का पेंच जल्द सुलझेगा

अध्यापकों के वेतन में फंसे 1.62 का पेंच जल्द सुलझेगा

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
बीमा सुविधा के संबंध में एक माह में हो सकता है फैसला

कार्यालयसंवाददाता|गुना

अप्रैल2013 के बाद नियुक्त अध्यापकों के वेतनमान में फंसा 1.62 का पेंच जल्द ही निकल सकता है। इस संबंध में अगले एक माह के दौरान फैसला हो सकता है।

वहीं अध्यापकों को बीमा सुविधा के संबंध में भी अगले एक माह के भीतर फैसला हो सकता है। राज्य अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं सुसनेर विधायक मुरलीधर पाटीदार के हवाले से जिलाध्यक्ष नरेंद्र भार्गव ने बताया कि 1.62 मामले में शिक्षा विभाग से नोटशीट चल पड़ी है। इस संबंध में जल्द ही वित्त विभाग द्वारा संशोधित आदेश जारी कर दिया जाएगा।

तबादलानीति

अध्यापकोंके लिए तबादला नीति भी संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा से पहले सकती है। यह परीक्षा अगले साल जनवरी माह में प्रस्तावित है। दरअसल सरकार का मानना है कि नवनियुक्त संविदा शिक्षकों को उन पदों पर आसानी से भेजा जा सकता है, जो अध्यापकों के तबादले के बाद खाली होंगे। वर्तमान में महिला एवं विकलांग अध्यापकों के अंतर्निकाय संविलियन ही हो पाते हैं। इससे सबसे बड़ा नुकसान यह है कि अध्यापकों की सीनियरटी चली जाती है।

युक्तिकरणसे पहले हो पदोन्नति

अध्यापकसंघ ने मांग की है कि युक्तिकरण से पहले अध्यापकों की पदोन्नति का लंबित मसला सुलझना चाहिए। संगठन ने डीईओ के साथ एक भेंट कर बताया कि सहायक अध्यापकों के 123 पद अध्यापक से वरिष्ठ अध्यापक के 49 पदों पर प्रमोशन होना है। इसके लिए तीन माह से प्रक्रिया चल रही है, लेकिन आज तक पूरी नहीं हो पाई। जबकि यह काम 15 दिन में हो जाना चाहिए था।

प्रभारीमंत्री को देंगे ज्ञापन

समयपर पदोन्नति प्रक्रिया पूरी होने का मसला अध्यापक संघ द्वारा प्रभारी मंत्री गोपाल भार्गव को ज्ञापन दिया जाएगा। मीडिया प्रभारी नरोत्तम यादव ने बताया कि 17 सितंबर को दिए जाने वाले ज्ञापन में पदोन्नति, संविदा शिक्षकों के संविलियन और गुरुजियों काे संविदा शिक्षक बनाए जाने का मुद्दा उठाया जाएगा।

क्या है 1.62 का मुद्दा

छठवेवेतनमान के तहत अध्यापकों के मूल वेतन में 1.62 गुना वृद्धि की गई थी। 30 मार्च 2013 के बाद नियुक्त अध्यापकों के वेतनमान में इस वृद्धि को नहीं जोड़ा गया। इसकी वजाए सभी का मूल वेतन एक जैसा कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि अध्यापक का वेतन वरिष्ठ अध्यापक से 300 रुपए ज्यादा हो गया। दूसरी विसंगति यह हुई कि अध्