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लक्ष्य से दूर है रबी फसल की बोवनी, पैदावार का संकट
{ बोवनी के सही समय 30 नवंबर के स्थान 11 दिसंबर तक सिर्फ 75 फीसदी ही हो सकी है रबी की बोवनी
{ कृषि विभाग दे रहा कम समय में पकने वाली किस्म बोने की सलाह
कार्यालयसंवाददाता | गुना
चालूरबी सीजन की फसलें फिर से कमजोर रह सकती है। पहले बोवनी और देरी से बोई गई फसलें कमजोर रह सकती है। वजह यह है कि इस बार रबी सीजन में कई किसानों से तय समय से पहले ही बोवनी आरंभ कर दी थी, जबकि कई किसान मौसम में बनी गर्माहट के चलते बोवनी से पिछड़ गए हैं। यही कारण है कि चालू सीजन में पहली और देरी से बोई गई फसलों की पैदावार कमजोर होने की आशंकाएं प्रबल हो रही है। उधर बोवनी का सही समय भी निकल गया है, लेकिन इसके बाद भी तकरीबन अभी तक 25 फीसदी खेत बोवनी से वंचित रह गए हैं।
जिले में रबी सीजन के लिए अभी (11 दिसंबर 2014 तक) महज 75 फीसदी की बोवनी हो सकी है। जबकि पिछले तीन, चार साल का रिकॉर्ड देखें तो नवंबर महीने के आखिर तक 100 फीसदी बोवनी निबट जाती थी। लेकिन इस बार बोवनी काफी पिछड़ गई है। अब जो किसान देरी से बोवनी कर रहे हैं वह सिर्फ कम समय में पकने वाली गेहूं की किस्म की बोवनी ही कर पाएंगे। उसमें भी पैदावार बहुत अच्छी निकलेगी। इसकी की भी संभावनाएं भी नहीं है।
अबकम दिन की फसल उगाएं
कृषिविभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब जो किसान बोवनी से रह गए हैं वह सिर्फ गेहूं की जी डब्ल्यू- 173, एमपी- 40-10 और एच एफ- 10- 70 किस्म ही बोएं। कृषि विभाग के मुताबिक गेहूं की यह किस्म 100 से 105 दिन में पक कर तैयार हो जाती है। जबकि गेहूं की दीगर किस्में 120 दिन की होती है। ऐसे में अब सिर्फ किसान कम समय में पक कर तैयार होने वाली फसलें उगानी होगी, ताकि वह समय पर सके।
फाइल फोटो
फिर भी खाली रह जाएंगे खेत
इससाल पिछले साल के मुकाबले में बोवनी कम हुई है। कृषि विभाग के मुताबिक तीन, चार साल पहले तक नवंबर महीने के तीसरे सप्ताह में करीब 75 से 80 फीसदी तक बोवनी निबट जाती थी। लेकिन इस बार बोवनी काफी पिछड़ गई है। कृषि विभाग के अधिकारी इसके पीछे की वजह मौसम में बनी गर्मी बता रहे हैं। कृषि विभाग के मुताबिक गेहूं की बोवनी के लिए अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। लेकिन 7- 8 दिसंबर तक तो तापमान सामान्य से चार पांच डिग्री सेल्सियस ऊपर रिकॉर्ड किया गया था। ऐसे में जो फसलें पहले यानी पहली बोवनी में उगाई गई थी, उनकी ब