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फोरम का फैसला

7 वर्ष पहले
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कोरियर कंपनी पर लगा अर्थदंड

तयसमय सीमा में पार्सल गंतव्य तक पहुंचाने के लिए उपभोक्ता फोरम ने मधुर कोरियर सर्विसेस को सेवा में कमी का दोषी माना है। उस पर 2 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया।

एक मासिक पत्रिका के प्रकाशक एवं आवेदक डॉ. लक्ष्मीनारायण शोभन द्वारा कोरियर कंपनी के जरिए एक पार्सल भोपाल भिजवाया था। आवेदक के वकील आरसी जैन ने बताया कि इस पार्सल में पत्रिका में प्रकाशित होने वाली सामग्री की पांडुलिपियां थीं। पूर्व में भी अावेदक उक्त कंपनी के माध्यम से ही पांडुलिपियां भेजता रहा है। वह आमतौर पर 2 दिन के भीतर भोपाल स्थित प्रिंटिंग प्रेस में पहुंच जाती थीं। पर इस बार ऐसा नहीं हुआ। कई दिन गुजर जाने के बावजूद पार्सल गंतव्य तक नहीं पहुंचा। जिसके नतीजे में पत्रिका के अंक का प्रकाशन नहीं हो पाया।

उधर मधुर कोरियर ने अपने जवाब में कहा कि आवेदक द्वारा जो कार्य किया जा रहा है, वह व्यवसायिक है, इसलिए वह उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता। साथ ही कंपनी ने दावा किया कि उसके द्वारा पार्सल को गंतव्य तक पहुंचा दिया गया था। हालांकि उपभोक्ता फोरम के मुताबिक कंपनी द्वारा ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया जा सका जिससे यह साबित हो कि उसके द्वारा उक्त पार्सल तय पते पर रवाना किया गया था।

माना सेवा में कमी

फोरमके अध्यक्ष आरके भावे एवं सदस्यगणनों ने अपने फैसले में कंपनी इस तर्क को अस्वीकार कर दिया कि आवेदक उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता। एक पुराने न्याय दृष्टांत का हवाला देते हुए फोरम के अध्यक्ष ने कहा कि कोरियर कंपनी के माध्यम से भेजे जाने वाले महत्वपूर्ण दस्तावेज अगर दिए पते पर पहुंचे तो उसे सेवा में कमी माना जाएगा। कंपनी को आदेश िदया गया कि वह आवेदक को दो हजार रुपए क्षतिपूर्ति के रूप में मय ब्याज अदा करे। साथ ही मुकदमा वकील की फीस के रूप में डेढ़ हजार रुपए भी दे।