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पकने से पहले ही काटने लग फसल

6 वर्ष पहले
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कुंभराज मंडी में रोजाना हो रही 700 से 800 बोरी धनिया की आवक

बारिश और बीमारी से खराब हो रही थी धनिया फसल, खराब मौसम

कार्यालयसंवाददाता|गुना

चालूरबी सीजन में हो रही मावठे की बारिश से खराब हो रही धनिया फसल को बचाने के लिए कई किसानों कच्ची फसल ही काटना शुरू कर दी है। दरअसल बीते दो महीने में अभी तक पांचवीं बार मावठा गिरा है। ऐसे में खेतों में खड़ी पहली बोवनी की धनिया फसल जो ठीक से पकी भी नहीं है किसान उसे काटकर मंडियों में बेचने लगे हैं। जिले में 58 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धनिया की फसल बोई गई थी। इसमें तकरीबन 40 प्रतिशत धनिया फसल पहली बोवनी की बताई जाती है। पहली बोवनी की इसी धनिया फसल को किसान काटकर बेच रहे हैं। दरअसल मावठे की बारिश से खेतों में खड़ी पहली बोवनी की धनिया फसल को सिर्फ नुकसान हो रहा था, बल्कि धनिया फसल को स्टेम गाल (देशी बोल चाल की भाषा में कुकड़ा ) रोग भी लग रहा था। ऐसे में जिले के विभिन्न हिस्सों में किसानों ने कच्ची फसलें ही काटकर मंडियों में बेचना आरंभ कर दिया है। जिले के कुंभराज, चांचौड़ा, आरोन, बमोरी, राघौगढ़ सहित जिलेभर के ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में किसान पहली बोवनी की धनिया फसल को कच्ची ही काटकर मंडियों में बेच रहे हैं, ताकि धनिया का रंग खराब होने से पहले ही उसका सही दाम ले लिया जाए। ऐसे में जिले में धनिया की पैदावार कमजोर रह गई है।

नुकसानसे बचने कच्ची फसलें काटना किसानों की भी मजबूरी

खराबमौसम और मावठे की बारिश से खराब हो रही धनिया फसल को कच्ची ही काटना किसानों की भी मजबूरी है। किसानों का कहना है कि हर 14 से 16 दिन के बीच हो रही बारिश और तेज हवाओं से पहली बोवनी की धनिया फसल जो पकने वाली स्थिति में थी उसका दाना लाल काला पड़ रहा था। साथ ही धनिया फसल को स्टेम गाल (देशी बोल चाल की भाषा में कुकड़ा ) रोग भी लग रहा था। ऐसे में पहली बोवनी की धनिया फसल सिकुड़कर काली पड़ रही थी। बीमारी और बारिश से धनिया फसल को जिले के विभिन्न ब्लॉकों के कई क्षेत्रों में 30 से 50 फीसदी तक नुकसान होने की बात सामने रही थी। जबकि खुद कृषि विभाग भी 10 से 12 फीसदी तक नुकसान होने की बात स्वीकार कर रहा है। ऐसे में धनिया की कच्ची फसल काटना किसानों की भी मजबूरी थी।

कई राज्यों में जाता है कुंभराज का धनिया

स्थानीयमंडी में बेहतर क्वालिटी की धनिया आती है। यही वजह है कि यहां से देश के कई महानगरों और बड़े शहरों सहित तमाम प्रांतों में धनिया बिकने जाता है। इनमें मप्र के इंदौर, जबलपुर, सागर, कटनी, सतना, ग्वालियर के अलावा महाराष्ट्र के पुणे, बंबई, हेमंत नगर, कोलापुर, नागपुर, उप्र के कानपुर, लखनऊ, आगरा, सारंगपुर यूपी, मुजफ्फर नगर, दिल्ली, राजस्थान के जयपुर, गुजराज के अहमदाबाद, सूरत, गांधीनगर सहित कई भारत के कई शहरों में धनिया भेजा जाता है।

समय से पहले कट रही धनिया फसल

^पहलीबोवनी की धनिया फसल को बारिश से नुकसान हो रहा था। धनिया का रंग लाल काला पड़ रहा था। घाटे से बचने के लिए कई किसान अभी से ही धनिया की फसलें खराब हो रही थी। 40 फीसदी धनिया पहली बोवनी की थी। 25 हजार हेक्टेयर में पहली बोवनी की धनिया की फसलें थीं। यूएसतोमर, उप संचालक कृषि गुना

आखिरी बोवनी की फसल की बढ़वार को मिलेगा फायदा

कृषिविभाग के अनुसार हर दो सप्ताह में हो रही बारिश से उन फसलों को विशष फायदा होगा। जो बोवनी की सही समय निकलने के बाद बोई गई थी। दरअसल चालू रबी सीजन में इस बार करीब 30 फीसदी बोवनी दिसंबर महीने के पहले सप्ताह में हुई है। ऐसे में देरी से बोई गई फसलों के लिए मावठे की बारिश का पानी अमृत के समान है। इससे देरी की बुवाई वाली फसलों को 40 से 50 फीसदी तक फायदा होगा।

दो महीने में पांचवीं बार गिरा मावठा

बीतेदो महीने के दौरान पांचवीं बार मावठा गिरा है। ऐसे में फसलों को नुकसान हो रहा है। दरअसल मावठे की पहली बारिश 12 से 14 दिसंबर 2014 को हुई थी। इसके बाद 31 दिसंबर 14 और एक जनवरी को भी बारिश हुई। 21 22 जनवरी को भी मावठे की बारिश हुई है। इसके बाद 29 और 30 जनवरी को भी पानी बरसा। अब हाल ही में सात और आठ फरवरी को भी मावठे की बारिश हुई है। ऐसे में पहली बोवनी की धनिया फसल पर आफत टूट रही थी।

कुंभराज| क्षेत्रके मृगवास गांव में पके बिना ही धनिया काटना शुरू कर दिया है। कारण यह है कि हाल की बारिश के कारण धनिया का रंग खराब हो गया है। इससे किसानों को आशंका है कि उनकी लागत भी वसूल नहीं हो पाएगी।