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अब 16 करोड़ की जरूरत

7 वर्ष पहले
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शहरमें स्पोटर्स कॉम्पलेक्स का सपना साकार होना साल दर साल मुश्किल होता जा रहा है। जो स्टेडियम तीन साल पहले सवा 8 करोड़ में बन जाता, उसी के लिए अब 16 करोड़ रुपए खर्च करना होंगे। वह भी तब जबकि काम जल्द से जल्द शुरू हो जाए। जिसकी संभावना कम ही नजर रही है।

इसका निर्माण पीडब्लूडी की पीआईयू यूनिट को करना है। पिछले साल तक इसकी लागत 13 करोड़ रुपए आंकी गई थी। उसके लिए प्रशासकीय स्वीकृति का इंतजार था। इससे पहले स्वीकृति मिलती नई एसओआर रेट लागू हो गईं। अब यही काम 16 करोड़ रुपए में होगा। पीडब्लूडी (पीआईयू) के संभागीय परियोजना यंत्री एके जैन ने बताया कि अब नई लागत के मुताबिक प्रशासकीय स्वीकृति लेना होगी। इसके लिए प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। उन्होंने कहा कि लागत में कम से कम 3 करोड़ का इजाफा होगा। इसके लिए रिवाइज एस्टीमेट बनाना होगा।

शुरूआतीटेंडर 2011 में

शुरुआतमें यह कॉम्पलेक्स संजय स्टेडियम में नपा द्वारा बनाए जाना था। इसके लिए टेंडर भी हो गए थे। अगर तब काम शुरू हो जाता तो इस पर 8.32 करोड़ रुपए ही खर्च होते। नपा ने दो बार इसके लिए टेंडर निकाले। उसके बाद उसने इस प्रोजेक्ट से अपने हाथ खींच लिए। उसके बाद स्टेडियम के लिए नई जगह तलाशी गई। यह काम पीडब्लूडी को सौंपा गया। नई जगह पर बनने वाले कॉम्पलेक्स की लागत 13 करोड़ रुपए आंकी गई। पर काम सुस्ती से चलता रहा। एक साल बीत जाने के बाद स्थिति वहीं गई है। नई लागत के साथ सब कुछ नए सिरे से कवायद करना पड़ेगी।

2.5

करोड़रुपए राज्यसभा सांसद निधि से अब तक जारी हुए हैं स्टेडियम के लिए। पीडब्लूडी के मुताबिक शेष राशि का अब तक कोई इंतजाम नहीं हो पाया है।

आरोप-प्रत्यारोपों में फंसा बड़ा प्रोजेक्ट

इसप्रोजेक्ट को लेकर कांग्रेस का कहना है कि चंद विकास विरोधी लोगों की साजिश के चलते यह स्थिति बन रही है। कांग्रेस अध्यक्ष योगेंद्र लुंबा ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले तीन साल से सतर्कता समिति की हर बैठक में इस प्रोजेक्ट पर अपडेट लेते रहे। इसके लिए जरूरी पैसा भी उपलब्ध कराया गया। पर राज्य सरकार की एजेंसियों कुछ राजनेताओं के अड़ंगे के चलते यह काम नहीं हो पाया। उन्होंने बताया इससे पहले भी एनीकट, आमोद पार्क जैसे प्रोजेक्ट में जनता का करोड़ों रुपए बेकार कर दिया गया है। आज इन ढांचों का कोई उपयोग नहीं रह गया है। दूसरी ओर नपा का तर्