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आईटी बाजार आधारित व्यवसाय का ही भविष्य है

7 वर्ष पहले
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प्र णबकुमार भुवनेश्वर की सिक्योरिटी एजेंसी में गार्ड थे। 48 वर्षीय कुमार को 7500 रुपए की तनख्वाह और कुछ भत्ते मिलते थे। इतनी कम पगार में घर का गुजारा तो ठीक चल रहा था लेकिन बेटी की शादी के लिए पैसे नहीं जुट रहे थे। उन्हें अपनी आमदनी को दोगुना करना था। लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए क्या और कैसे करना है।

प्रणब ने पांच हजार रुपए की सिक्योरिटी राशि जमा करके नया काम शुरू किया। वह इलाका जहां वे बतौर सिक्योरिटी गार्ड काम करते थे वह वैसा ही है। लेकिन कस्टमर को जो वह डिलीवर कर रहे हैं वह बदल गया है। पहले वे सुरक्षा प्रदान करते थे अब पैकेज्ड सब्जी बेचते हैं। वे अपने लक्ष्य के थोड़ा करीब पहुंच गए हैं। अब वे 15 हजार रु. प्रति माह कमा रहे हैं। सिर्फ दो घंटे ज्यादा काम करके। ताजा सब्जियों की पैकेट उन्हें हर सुबह डिलीवर किए जाते हैं। बची हुई सब्जी शाम को वापस हो जाती है। सब्जियों की पैकेजिंग वेजी कार्ट कंपनी करती हैं। प्रणब हर महीने 15 लाख रु. की सब्जी बेचते हैं। उन्हें कंपनी दस फीसदी कमीशन देती है। वेजी कार्ट दो साल पुरानी कंपनी है। इसे भुवनेश्वर में स्थित एमजीएम एग्रीवेंचर्स और ईकुटीर ग्रामीण प्रबंधन सेवा ने मिलकर बनाया है। इसे स्थापित करने का मकसद था कृषि संबंधी बेहतरीन ज्ञान रखने वाले किसानों को ज्यादा बेहतर खेती करने के तरीके बताए जाएं। साथ ही उन्हें यह भी बताया जाए कि कैसे उनकी फसल का उत्पादन और आय बढ़ सकती है। ईकुटीर चार राज्यों के 55 हजार किसानों के साथ मिलकर काम करती है। वह किसानों को लगातार बताती रहती है कि किस फसल से उनको फायदा होगा। साथ ही उनकी पैदावार बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तौर-तरीकों से वाकिफ कराता है। यह मिशन 57 वर्षीय नाबार्ड कर्मचारी कृष्णचंद मिश्रा ने शुरू किया है। उन्होंने 20 सालों तक का समय किसानों के साथ बिताया है।

मिश्रा ने माइक्रो फाइनेंस संस्था ग्रामीण बैंक ऑफ बांग्लादेश से हाथ मिलाया। यह बैंक नोबेल विजेता मोहम्मद युनुस ने शुरू किया था। साथ ही बैंक द्वारा बनाए गए ईकुटीर सॉफ्टवेयर की मदद से फसल की पैदावार बढ़ा रहे हैं। हर किसान को एक विशिष्ट संख्या दी गई है। इसमें उसकी सभी माइक्रो डिटेल दी गई हैं। जैसे- मिट्टी की स्थिति, आकार, पानी की सप्लाई, काम करने वाले सहयोगियों की संख्या। इन सब के आधार पर वे किसानों को सलाह देते हैं।