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नामांकन विवाद में 500 से ज्यादा विद्यार्थियों का भविष्य अधर में

7 वर्ष पहले
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यूनिवर्सिटीमें छात्रों के नामांकन को लेकर चल रहे विवाद का हल मंगलवार को भी नहीं निकल पाया। इसके चलते अकेले पीजी कॉलेज में 500 से ज्यादा विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। वहीं छात्र संगठन डीएसओ ने चेतावनी दी है कि इस मामले में बुधवार तक अगर कोई हल नहीं निकला तो वह आंदोलन शुरू कर देगा। यूजी पीजी के 500 से ज्यादा छात्राें के नामांकन नहीं हो पाए हैं। नियमानुसार इसके चलते यूजी के छात्र प्राइवेट हो जाएंगे और पीजी (एमएससी) के छात्रों का तो पूरा साल ही बिगड़ जाएगा, क्योंकि उसमें प्राइवेट का प्रावधान ही नहीं है। कॉलेज प्रबंधन के मुताबिक एमएससी के 50 ऐसे छात्र हैं, जिनका नामांकन नहीं हो पाया है। इसकी वजह से यह लोग परीक्षा में नहीं बैठ पाएंगे। 12 दिसंबर को फॉर्म भरने की अंतिम तिथि है। मंगलवार को छात्रों के साथ उनके अभिभावक भी कॉलेज पहुंचे। वहीं कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि उनके हाथ में कुछ नहीं है।

छात्र उनके अभिभावक मंगलवार को पीजी कॉलेज में पहुंचे। नामांकन विवाद को लेकर भारी नाराजगी है। इस मामले के बुधवार को और तूल पकड़े जाने की संभावना है।

प्राइवेट छात्राें के नामांकन की प्रक्रिया को क्यों लागू नहीं किया जा रहा!

कॉलेजप्रबंधन छात्र संगठनों का कहना है कि प्राइवेट छात्र के नामांकन के लिए जो प्रक्रिया अपनाई जा रही है, उसे रेगुलर छात्रों के लिए क्यों नहीं खोला जा रहा? प्राइवेट छात्रों के ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म के साथ नामांकन फॉर्म भी साइट पर ओपन किए जा रहे हैं। छात्र दोनों एक साथ भर रहे हैं। उनका कहना है यही काम रेगुलर छात्रों के लिए भी हो सकता है। उनके परीक्षा फॉर्म भी ऑनलाइन ही भरे जा रहे हैं। डीएसओ का कहना है कि एडमिशन से लेकर एग्जाम अन्य प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर निजी कंपनियों को भारी लाभ पहुंचा जा रहा है। तमाम सेवाएं इसकी वजह से महंगी हो गई हैं। साथ ही उनकी खामियों का दुष्परिणाम भी छात्रों को ही भुगतना पड़ता है।

ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण हुई गड़बड़ी साइट नहीं खोल रही है यूनिवर्सिटी

पीजीकॉलेज के प्रशासनिक अिधकारी डॉ. वीके तिवारी ने बताया कि मंगलवार को इस मुद्दे पर दिनभर प्रयास किए जाते रहे। यूनिवर्सिटी के संबंधित अिधकारियों को भी पूरी जानकारी दी गई। इसके बावजूद देर शाम तक साइट ओपन नहीं हुई। उन्होंने कहा कि नामांकन प्रक्रिया ऑनलाइन होना है, इसलिए स्थानीय स्तर पर