रजिस्ट्रेशन में उलझे कॉलेज छात्र
पीजी के छात्रों को कराना पड़ता है नामांकन का रजिस्ट्रेशन
कार्यालयसंवाददाता|गुना
जीवाजीयूनिवर्सिटी द्वारा पीजी के छात्रों से नामांकन के रजिस्ट्रेशन के नाम पर बेवजह वसूली की जा रही है। प्रदेश की किसी भी अन्य यूनिवर्सिटी में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है।
हाल ही में ऑनलाइन नामांकन को लेकर उठ रहे विवादों के बीच यह मुद्दा भी गरमा गया है। छात्र संगठन डीएसओ की कॉलेज इकाई के पदाधिकारियों का कहना है कि उन्हें जानकारी मिली है कि इस तरह की प्रक्रिया किसी अन्य यूनिवर्सिटी में नहीं अपनाई जा रही। इसका बोझ पीजी के स्टूडेंट्स पर पड़ रहा है। उन्हें 40 रुपए पोर्टल चार्ज जमा कर रजिस्ट्रेशन कराने का आदेश जारी किया गया। जब तक छात्रों को इसकी जानकारी मिल गई, तब तक इसकी अंतिम डेट निकल चुकी थी। लेट फीस के रूप में उन्हें 400 रुपए अदा करने पड़े। नतीजा यह हुआ कि एक बेवजह की प्रक्रिया के लिए हर छात्र को 440 रुपए जमा करने पड़ गए।
डीएसओ के अध्यक्ष नारायण चंदेल ने बताया कि छात्र अगर लगातार यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा है तो उसे नामांकन का दुबारा रजिस्ट्रेशन कराने की क्या जरूरत है? हां अगर छात्र माइग्रेशन सर्टिफिकेट लेकर यूनिवर्सिटी छोड़ देता है और बाद में फिर पढ़ने आता है तो उसे पुन: नामांकन कराना होता है। उन्होंने बताया कि अन्य यूनिवर्सिटी में उनके संगठन द्वारा यह जानकारी दी गई है कि इस तरह की प्रक्रिया वहां नहीं अपनाई जा रही है।
लेटफीस थी, समय सीमा
उधरकई छात्रों का कहना है कि पूर्व में नामांकन को लेकर लेट फीस या किसी तरह की कोई समय सीमा का प्रावधान नहीं था। जिन छात्रों का नामांकन नहीं होता था, उनकी मार्कशीट रोक दी जाती थी। बाद में छात्र नामांकन कराकर मार्कशीट प्राप्त कर लेते थे। छात्र किसी भी समय नामांकन करा सकते थे।
गुना| पीजीकॉलेज में तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान जगह फर्नीचर की इतनी कमी थी कि छात्रों को बिल्कुल पास-पास बिठाया गया। पूरा फर्नीचर बाहर से मंगवाया गया था, इसलिए उसमें यह गुंजाइश ही नहीं थी कि छात्रों को दूर-दूर बिठाया जाए।
छात्रों को नहीं चल पाया पता
नामांकनकी इस प्रक्रिया में छात्रों को किस कदर ठगा जा रहा है, यह अब सामने आने लगा है। डीएसओ की सचिव सोनम शर्मा ने बताया कि दरअसल जब यूनिवर्सिटी ने ऑनलाइन नामांकन की प्रक्रिया शुरू की थी, तब इसकी फीस 140 रुपए त