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मनरेगा में जिले की रैंकिंग 13वें नंबर पर पहुंची

7 वर्ष पहले
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मनरेगामें जिला तीन माह में ही 7 पायदान नीचे गया है। राज्य स्तर पर हुई ग्रेडिंग में जिले को 13वां स्थान मिला है। जबकि जुलाई में जिले की स्थिति प्रदेश में बेहतर थी।

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना पहली बार संकट के दौर में हैं। पिछले कई माह से मांग के अनुसार राशि नहीं रही है। इस वजह से विकास कार्य रुक गए हैं। जिले में सैकंडों मजदूरों को भुगतान नहीं हो पा रहा है। इस वजह से हालत खराब हो गए है। रोजगार की गारंटी वाले इस कानून के तहत हर हाल में 15 दिन के भीतर मजदूर को भुगतान अनिवार्य हैं। जिले में सैंकड़ों काम स्वीकृत पड़े हुए हैं, लेकिन इन्हें अब तक चालू नहीं कराया गया है। मैदानी अमला भी काम करने से कतरा रहा है। उनका कहना है कि अगर काम शुरू करवा दिया तो लेने के देने पड़ जाएंगे। मजदूर भुगतान का दबाव बनाएंगे। इसके अलावा कच्चा मटेरियल खरीदी के दौरान भी भुगतान को लेकर परेशानी पैदा हो सकती है।

उधारीसे चलाया काम : जिलापंचायत ने रोजगार गारंटी योजना के तहत राशि आने पर उधारी से काम चलाया है। कई माह से राशि नहीं आई है। इस वजह से वेतन तक के लाले पड़ गए हैं।

13वेंस्थान पर : जुलाईमाह में जिले को प्रदेश में 6वीं ग्रेड मिली थी। तत्कालीन सीईओ शेखर वर्मा ने अपने कार्यकाल के दौरान कई काम किए थे। उस समय फंड की कमी थी। इसके बाद भी जिला बेहतर स्थिति में गया था।

फाइलअटकाई : जनपदके कर्मचारियों को संविदा अवधि कई माह से नहीं बढ़ाई गई है। इससे कर्मचारियों में नाराजगी है। कर्मचारियों का कहना है कि सीआर भी जमा कराई जा चुकी है। इसके बाद भी फाइल को अटकाया जा रहा है। इसकी वजह भी नहीं बताई जा रही है।

सिर्फ 2.90 करोड़ मिले : जिलेमें 10 करोड़ रुपए से ज्यादा की जरूरत थी, लेकिन सिर्फ 2 करोड़ 90 लाख रुपए ही मिले हैं। इस राशि पर भी होल्ड लगवा दिया है। ताकि कर्मचारियों को वेतन जारी किया जा सके। 5 माह से फंड होने से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है।