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अदालत में पलटे गवाह, मृत्यु पूर्व बयान के आधार पर मिली सजा

7 वर्ष पहले
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लाठीके हमले में हुए मौत के मामले में अदालत ने एक आरोपी को आपरािधक वध का दोषी मानते हुए 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में खास बात यह थी कि सभी अहम गवाह अपने बयान से पलट गए थे। अदालत ने मृतक के मृत्यु पूर्व बयान को आधार मानते हुए आरोपी को सजा सुनाई।

लोक अिभयोजक देवेंद्र कुमार पलिया ने बताया कि थाना जामनेर के गोविंदपुरा में 14 अक्टूबर 2013 को हुए विवाद के बाद आरोपी घनश्याम पिता ईश्वरलाल भील ने रमेश भील पर लाठी से हमला कर िदया था। इस घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे गुना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

पुलिस ने इस मामले में हत्या का प्रकरण दर्ज किया था। सुनवाई के दौरान फूलसिंह रूपसिंह नामक दो अहम गवाहों ने अपना बयान बदल दिया। उन्होंने पूरी घटना से इंकार किया। एक अन्य गवाह धीरज भी होस्टाइल हो गया। इस स्थिति में पुलिस के पास सिर्फ वह बयान बचा था जो धारा 161 के तहत घायल रमेश ने दिया था।

धारा304(2) के तहत दोषी माना

मामलेमें सुनवाई के बाद न्यायाधीश आरबी कुमार ने उक्त बयान को मृत्युकालीन बयान मानते हुए आरोपी को सजा सुनाई। हालांकि उसे हत्या के लिए दोषी नहीं माना गया। अदालत ने आरोपी को धारा 304(2) यानि आपराधिक मानव वध का दोषी करार दिया। उसे 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई।