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उल्टी-दस्त से हुई मौत भी हो सकती है हत्या का मामला
फोरेंसिक साइंस पर सेमिनार में उठाए अपराध के नए तौर-तरीकों पर से पर्दे
कार्यालयसंवाददाता: गुना
अपराधियोंने बदलते परिवेश के साथ-साथ अपने तौर तरीके भी बदल लिए हैं। उल्टी-दस्त जैसी मामूली बीमारी भी कभी-कभी हत्या की श्रेणी में शामिल हो सकती है। अपराधी स्लो पोइजन का सहारा लेकर ऐसी वारदातें करते हैं। यह कहना था ग्वालियर से आए फोरेंसिक एक्सपर्ट का। रीजनल फोरेंसिक ग्वालियर से आए विशेषज्ञों ने अपराध अनुसंधान पर भास्कर से कई बिंदुओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे अपराधी वारदात के तरीके बदल रहे हैं। वह घटना स्थल के साक्ष्यों को भी नष्ट कर देते हैं। इसलिए बड़े ही बारीकी से भौतिक जन्य साक्ष्य जुटाए जाने चाहिए। उन्होंने लोगों को भी सतर्क रहने को कहा। फंस भी सकते हैं
सेमिनारमें दी भी दी जानकारी
घटनास्थल पर मिलने वाले साक्ष्य जुटाने से लेकर अन्य जानकारी दी गई। इसी श्रंखला में गुना में सेमीनार हुआ। इसमें ग्वालियर के विशेषज्ञ डॉ. एसपी शर्मा एवं डॉ. विनोद ढीगरा गुना आए। उन्होंने भौतिक जन्य साक्ष्य के महत्व एवं इससे अपराधियों की पहचान के करने के बारे में बताया। एसपी पीएस विष्ट ने भी अपनी बात रखी। एसडीओपी केजी राठौर, सीएसपी लवली सोनी, एफएसएल अधिकारी आरसी अहिरवार सहित अन्य पुलिस अधिकारी सेमीनार में उपस्थित थे।
बेगुनाह भी फंस जाते हैं हत्या में
विशेषज्ञ डॉ. एसपी शर्मा ने बताया कि आपने अपराध ही नहीं किया और आप इसमें फंस भी सकते हैं। उन्होंने एक मामले पर किए फोरेंसिक अनुसंधान का खुलासा किया। श्री शर्मा ने बताया कि गुना जिले के धरनावदा थाना क्षेत्र में हुई एक आत्महत्या मामले में हत्या का प्रकरण दर्ज हुआ था। फरियादी पक्ष ने गोली मारकर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जब इसकी की रेंज की पड़ताल की तो पूरा मामला ही उलट गया। फरियादी पक्ष का कहना था कि आरोपियों ने 60 फीट की दूरी से गोली मारी। जब भौतिक जन्य साक्ष्य एवं फोरेंसिक लैब से आई रिपोर्ट का मिलान किया तो गोली चलने की रेंज एक फीट बताई गई।
दो माह में असर दिखाता है स्लो पाइजन
विशेषज्ञडॉ. विनोद ढीगरा ने बताया कि परिवार में भी छोटी-छोटी बातों को लेकर बड़ी घटनाएं हो जाती है। यहीं से अपराध शुरू होता है। स्लो पोइजन के माध्यम से भी वारदातें हो रही हैं। उन्होंने बताया कि उल्टी-दस्त जैसी मामूली बीमारी भी हत्या की श्रेणी में सकती