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- 17 साल लड़ते रहे, मिल बैठे तो मिनटों में सुलझ गया विवाद
17 साल लड़ते रहे, मिल बैठे तो मिनटों में सुलझ गया विवाद
17साल तक एक बैंक और निजी फर्म के बीच 9 लाख के लेन-देन का मामला अदालत में चलता रहा। कोई हल नहीं निकला। जब उनका मामला मध्यस्थता के मंच पर पहुंचा तो चंद मिनटों में सुलझ गया। यह सब कुछ हुआ जिला न्यायालय में चल रही मध्यस्थता (मीडिएशन) प्रक्रिया के माध्यम से। यह सफलता सिर्फ एक प्रकरण में नहीं बल्कि ऐसे कई मामलों में मिली।
जिला न्यायालय में गत वर्ष यानी 2014 में ही मीडिएशन प्रक्रिया को मजबूती से लागू किया गया। इसका असर भी शुरू हुआ। जब मामले मध्यस्थता के मंच पर पहुंचे तो सफलता मिलना शुरू हो गई। जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष विधिक सेवा प्राधिकरण डॉ. मोहम्मद शमीम ने वर्ष 2014 में कुल 482 प्रकरणों को मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने के लिए भेजा। इनमें से आधे से ज्यादा यानी 54 फीसदी प्रकरणों में सफलता मिली। 63 प्रकरणों का समझौता खुद डीजे ने कराया। प्रक्रिया के संचालन में न्यायाधीश एवं प्रशिक्षित पांच वकील शामिल होते हैं।
दोनोंपक्ष से होती है चर्चा : मध्यस्थतासे सुलह कराने के लिए दोनों पक्ष को एक मंच पर बुलाया जाता है। इसमें दोनों पक्ष अपने वकीलों के साथ मंच पर आते हैं। मीडिएटर अधिवक्ता सभी को सुनते हैं। उन्हें समझने के लिए 3 मौके भी दिए जाते हैं। इसके बाद न्यायाधीश उन्हें सुनते हैं। समझौता होने पर प्रकरण समाप्त होता है।
मध्यस्थता के लिए कोर्ट परिसर में बकायदा अलग भवन भी मौजूद है। अब सुलह योग्य प्रकरणों को इसी रास्ते से सुलझाने का प्रयास चल रहा है।