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अदालत में लंबित मामलों में कराया समझौता तो दूर हो गई दिलों की दूरियां

6 वर्ष पहले
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सन्1997 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से अग्रवाल एंड कंपनी ने 6 लाख रुपए नकद एवं 3 लाख रुपए चैक परचेज सुविधा का लाभ लिया था। जब ऋण अदायगी नहीं हुई तो बैंक ने अदालत में प्रकरण पेश किया। 17 साल तक विवाद चला। मध्यस्थता से समझौता हुआ कि 6 लाख की एफडी और 2 लाख 25 हजार रुपए के भुगतान पर प्रकरण समाप्त किया और बैंक ने ब्याज भी माफ कर दिया।

{ दूसराप्रकरण

गुनानिवासी अरविंद्र जैन ने क्षेत्रपाल बाबा चैरटेबल समिति को साढ़े 16 लाख रुपए उधार दिए थे। इसके बदले समिति ने चैक दिया था। चैक बाउंस होने पर अदालत में इस्तगासा पेश की गई। कई समय तक मामला अदालत में चला। इसे समझौता हुआ कि तीन किश्तों में 20 लाख रुपए का समिति करेगी।

{ तीसरामामला

पंजाबीमोहल्ला निवासी संगीता लंबा ने प्रेमी कालोनी में स्थित अपना किरायेदारी वाला भाग खाली कराने के लिए पुरुषोत्तम शर्मा के खिलाफ अदालत में प्रकरण लगाया। वर्ष 2011 से मामला अदालत में चल रहा था। इसे मध्यस्थता से इसे सुलझाया। समझौते में तय हुआ कि किराएदार 6 लाख 25 हजार की राशि लेकर भू-भाग को खाली करे।

कुछ खास केस