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शहर में एनएच का यह हाल

7 वर्ष पहले
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थोड़ा-सा पानी क्या बरसा, शहर से निकले हाईवे का बुरा हाल हो गया। बैतूल-इंदौर नेशनल हाईवे 59 पर प्रताप टॉकीज तिराहे से मिडवे डिवाइडर लगाए गए हैं। यहां सड़क का अाधा हिस्सा कीचड़ से पटा हुआ है। रोड के बड़े गड्ढे हादसे को न्योता दे रहे हैं। ऐसे गड्ढे स्टेशन रोड, हरदौल बाबा, एसबीआई तिराहे से लेकर साईं मंदिर तक हैं। यहां से गुजरना राहगीरों दुपहिया वाहन चालकों के लिए परेशानी भरा है।

नगरपालिका के नोटिस भी बेअसर, खाली प्लाटों से नहीं निकाला पानी

नगर में 12 महीने पानी से घिरे हैं घर, नपा के पास नहीं पानी निकासी की व्यवस्था

हरीकाई की परत भरे पानी से घिरे घर। इसी पानी में पन्नियां, पुराने टायर, डिब्बे, घरों से निकला कचरा। मलेरिया और डेंगू के मच्छर इसी पानी में पनप रहे हैं। जब रहवासियों में इन रोगों के लक्षण दिखे तो खुद कलेक्टर कॉलोनियों में पहुंचे। आनन-फानन में नालियों के किनारे सफेद कीटनाशक पावडर छिड़क दिया गया। रहवासियों ने बड़ी समस्या कॉलोनियां वैध नहीं होना और खाली प्लाटों पर भरे पानी की बताई। कलेक्टर के निर्देश पर मुनपा अधिकारी ने ऐसे प्लाट पर मकान नहीं बनाने वाले मालिकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए जो बेअसर साबित हो रहे हैं।

नोटिस बेरंग वापस गए

^हमनेशकूर-सत्तार कॉलोनी में ऐसे 14 प्लाट चिंहित किए जहां हमेशा पानी भरा रहता है। इन प्लाट के मालिकों को नोटिस भिजवाए गए थे। कुछ का सही पता नहीं मिलने से नोटिस वापस गए और कुछ प्लाट मालिक बाहर रहने से उनका पता पड़ोसियों काे भी नहीं मालूम। समस्या यह है कि आसपास कोई नाला भी नहीं जहां खाली प्लाटों में भरे पानी की निकासी करवा सकें। देवबालापिपलोनिया, सीएमओनगरपालिका, हरदा

मकान के आसपास पानी

यहहै शहर के बीचोंबीच बनी प्रताप कॉलोनी। सड़क, सफाई और पार्क और पानी की समस्या बरसों से नहीं सुलझीं। इसी कारण कई लोगों ने खाली प्लाट पर मकान नहीं बनाए। अब यही खाली प्लाट यहां बस चुके रहवासियों की परेशानी का कारण बन गए हैं। कॉलोनी में पक्की सड़क और नाली नजर नहीं आती। पानी की निकासी का समुचित प्रबंध ही नहीं है। मकान पानी से घिरे हैं। नालियों का पानी रास्ते पर बह रहा है। हर तरफ कचरे का ढेर है। कॉलोनी में विनीता रघुवंशी कहती हैं, सफाई कर्मियों को बुलाकर खुद के खर्चे पर रहवासी साफ-सफाई करवाते हैं।

इनकी सुनिए

लोग बीमार होते हैं

^वार्डमें पक्क