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लावारिस की तरह 36 घंटे रखा रहा जवान का शव

7 वर्ष पहले
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हैलोसर, मैं हाॅस्पिटल से बोल रहा हूं। एक फौजी का शव दो दिन से रखा है। बदबू आने लगी है। शव को हरियाणा ले जाना है। आप कुछ मदद करवाइए। यह फोन सिविल सर्जन को लगाया गया। उनका जवाब था, हमारे पास शव सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं है पर बर्फ रखवा देते हैं।

जिला अस्पताल में मानवीयता उस समय शर्मसार हो गई जब एक फौजी का शव दो दिन लावारिस की तरह रखा रहा। 15 सितंबर की रात चारखेड़ा ट्रैक पर कामायनी एक्सप्रेस ट्रेन से फौजी सुभाष चौहान गिर गया था। जेब में रखे एसी बी-1 काेच में सागर के रिजर्वेशन टिकट से मृतक की पहचान हुई कि वह एपीओ सागर में हवलदार था। रेलवे पुलिस ने यह शव जिला अस्पताल पहुंचा दिया फिर कोई खबर नहीं ली। हवलदार का शव पोस्टमार्टम के बाद स्ट्रेचर पर एक कोने में रख दिया। हरियाणा के भिवानी जिले से फौजी के भाई दिनेश सिंह चौहान अन्य परिजन रात में हरदा आए। सुबह शव की दशा देखकर वे व्यथित थे। मृत्यु के 36 घंटे बीत जाने के बाद भी अस्पताल में शव सुरक्षित ढंग से रखने की कोई व्यवस्था नहीं थी। यह देख भाई दिनेश सिंह ने अस्पताल में बात की तो एक स्वीपर ने पावडर लाने 3 सौ रुपए और लगाने के एवज में 5 सौ रुपए ले लिए। यह मामला कलेक्टर रजनीश श्रीवास्तव तक पहुंचा। उन्होंने तहसीलदार एसडीएम काे अस्पताल भेजा फिर खुद भी गए। उनके हस्तक्षेप से शव पर कीटाणुनाशक पावडर छिड़कवाकर लकड़ी के बुरादे के साथ बर्फ में रखवाया गया।





गाड़ी से शव रवाना हाेने तक एसडीएम दूसरे अधिकारी रुके। उन्होंने शव पर चादर फूलमाला भी चढ़ाई।

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कलेक्टर को आना पड़ा अस्पताल