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छात्राएं बोलीं- दहेज प्रथा से उपजी है कन्या भ्रूण हत्या

7 वर्ष पहले
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कन्या भ्रूण हत्या, एक अभिशाप विषय पर मप्र मानव अधिकार आयोग ने शनिवार को इंदौर रोड के होली फेथ कॉलेज सभागार में सेमीनार किया। गर्भ में ही कन्याओं की मौत पर छात्राओं ने गहरी चिंता जताई। उनका कहना था, समाज में यह समस्या दहेज प्रथा के कारण भी आई। बेटी अब खुद आत्मनिर्भर हो रही है, उसे बोझ समझने की धारणा बदलनी होगी।

सेमीनार की अध्यक्षता कर रहीं जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. यामिनी मानकर ने कहा, बेटे की चाहत, पुराने रीति-रिवाज अशिक्षा ही कन्या भ्रूण हत्या के लिए उत्तरदायी है। इस कुरीति को रोकने महिलाओं को ही जागरुक होना पड़ेगा वहीं कानून अपना काम पूरी कड़ाई से करे। कॉलेज की छात्रा रितु विश्नोई ने साफतौर पर कहा कि दहेज प्रथा जैसी कुरीति ने इस समस्या को भयावह बनाया है। छात्रा हर्षिता विश्नोई का कहना था, कन्या परिवार का बोझ बन रही है, यह सोच चिंता का कारण है। संध्या विश्नोई ने विषय को विस्तार देते हुए कहा, बालिकाओं को नियम-कायदों की बेड़ियों में जकड़ना और महिलाओं को दोयम दर्जे का समझकर फतवे तक जारी कर दिए जाते हैं। मंच पर मौजूद मुख्य जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेएस अवास्या ने शिक्षा और जागरुकता को बढ़ावा देने की बात कही। कन्या भ्रूण हत्या को रोकने बने एक्ट के बारे में बताया। ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. रूबी खान ने बताया, सोनोग्राफी तकनीक के दुरुपयोग से पंजाब-हरियाणा जैसे राज्यों में कन्याओं के भ्रूण नष्ट कराने के मामले बढ़े हैं। लायनेस रेखा पटेल ने बेटियों की बेहतर शिक्षा और उनके प्रति सामाजिक संरक्षण की जरूरत बताई।

आयोग मित्र सुनीता जैन ने कहा कि सजग संवेदनशील समाज से ही इस कुप्रथा पर रोक लगना संभव है। मंच संचालन सेमीनार के सूत्रधार ज्ञानेश चौबे ने किया। आभार ओमनारायण शुक्ला ने माना। कार्यक्रम में पार्षद दुर्गा आंजने, अनीता अग्रवाल, दीपक शर्मा, अनूप जैन, संजय जैन, राकेश गार्गव, जेकब सेमुअल, रेखा विश्नोई ने भी हिस्सा लिया।