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त्रासदी भी होती है

7 वर्ष पहले
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त्रासदी भी होती है

^लोकअदालत का उद्देश्य सभी पक्षकारों के आपसी मनमुटाव को दूर कर उनमें सामंजस स्थापित करना है ताकि यह मनमुटाव भविष्य में रहे, प्रायः दिवानी मामलों में देखा गया कि सालोंसाल पीढ़ी दर पीढ़ी मुकदमें चलते हैं जिससे लोगों का धन एवं समय के साथ मानसिक त्रासदी भी भोगनी पड़ती है।^ -योगेशसोनगरिया, जिलान्यायाधीश हरदा

संतुष्टहोकर जाते हैं

^लोकअदालत से मिले न्याय से दोनों पक्षों में समझौता होने से किसी के मन में यह मलाल नहीं रहता कि मुझे हार मिली। दोनों हंसी खुशी संतुष्ट होकर अपने घर जाते हैं।^ -रजनीशश्रीवास्तव, कलेक्टरहरदा

आशंकादूर होती

^कईबार गाली-गलौच मारपीट के मामूली झगड़े कोर्ट में चलते रहने से दोनों पक्षकाराें और उनके परिवार के बीच वैमनस्य बना रहता है। इससे दूसरी बार भी फसाद हो सकता है। केस खत्म होने यह आशंका दूर होती है।^ -प्रेमबाबूशर्मा, एसपीहरदा

प्रकरणशामिल होते

^एकदिन में 77 हजार केस सुलझने का बड़ा आंकड़ा इसलिए सामने आया क्योंकि इसमें नगरपालिका, राजस्व, बिजली, बैंक समेत दर्जनभर विभागों के आए प्रकरण शामिल होते हैं। कुछ पहले के सुलझे केस भी लोक अदालत में घोषित किए जाते हैं।^ -आलोकगोयल, अध्यक्षजिला बार एसोसिएशन