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गुरव वाणी सहेजने के लिए घर-घर दस्तक दे रहे युवा

5 वर्ष पहले
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वाट्सएप व फेसबुक से जोड़ रहे युवाओं को

भास्कर संवाददाता | हरदा

गुरव समाज के लोग लुप्त हो रही बोली को सहेजने के लिए घर-घर दस्तक दे रहे हैं। वे समाज के लोगों से 58 बिंदुओं पर जानकारी एकत्रित कर रहे हैं। ताकि उसे गुरव वाणी पुस्तिका में प्रकाशित किया जा सके। ताकि समाज के लोगों तक इसे पहुंचाकर गुरव वाणी को सहेजा जा सकें।

अभियान को लेकर मीडिया प्रभारी हेमंत मोराने ने बताया नई पीढ़ी बोली से दूर हो रही है। इसे बचाने और युवाओं को इससे जोड़ने के लिए हाईटेक तरीके अपनाने होंगे। समाज जनों द्वारा बोली जाने वाली बोली के ऑडियो-वीडियोरप व पेज बनाकर युवा पीढ़ी को जोड़ने का कार्य प्रारंभ किया जा रहा है। वहीं प्रदेश प्रवक्ता जितेंद्र वाघे ने समाज के हर घर जाकर गुरव वाणी को सहेजने के लिए घर-घर जाकर प्रचार-प्रसार किया जाए। समाज के लोग 6 माह से जानकारी एकत्रित कर उसे शुद्ध रुप देने में लगे है। गुरववाणी समाज के लिए एक धरोहर का काम करेगी।

यह ले रहे हैं जानकारी

समाज के अध्यक्ष महेश चोलकर ने बताया युवाओं द्वारा घर-घर जाकर किए जा रहे सर्वे में जो विवाह विधि, लग्न विधि, माता पूजन, गणगौर का संपूर्ण विधि विधान, सामाजिक कार्यों में गाए जाने वाले गीत, कुलदेवी पूजन समेत भाषा के शब्दों का संग्रह समाज के युवाओं द्वारा किया जा रहा है।

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