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छेड़छाड़ होने पर सामाजिक डर से चुप रह जाती छात्राएं

7 वर्ष पहले
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महिला हिंसा विरोधी पैरवी में जन राय सुझाव सामने आए, 60 लोगों में से 22 महिलाओं ने भी दी अपनी राय

हरदाको महिला हिंसा मुक्त नगर बनाने एक अभियान चलाकर तीन सवालों पर जन राय सुझाव लिए गए। इसके जरिए यह तथ्य सामने आया कि लोगों ने किस-किस तरह की हिंसा की घटनाएं देखीं। इस दिशा में पुलिस प्रशासन को क्या कदम उठाने चाहिए। और वे स्वयं इसके लिए क्या काम करेंगे। सिनर्जी संस्थान के तीन मुद्दों पर 60 लोगों में से 22 महिलाओं ने अपनी राय दी। सर्वे में 15 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक की उम्र के प्रतिभागी शामिल किए गए।

यूथ को-ऑर्डिनेटर सिनर्जी संस्थान की मीनू वर्मा ने बताया की सर्वे में ऐसे लोग भी मिले जो अपनी प्रतिक्रिया देने से बच रहे थे। समाज में जागरूकता की कमी है। हम स्कूलों में भी सेशन कर रहे हैं जिससे ठोस नतीजा निकले। छात्राएं छेड़छाड़ की घटनाओं पर चुप रहें।

अभियान समन्वयक विमल जाट ने कहा, कि हरदा को महिला हिंसा मुक्त बनाने की पहल शुरू की गई है। तीन मुद्दों पर जनता से फार्म भरवाए गए। यह पता चला किस तरह छेड़छाड़ की घटनाएं लोगों ने देखी, जनता और पुलिस की क्या भूमिका रही। यह मुहिम यहीं खत्म नहीं होगी।

अभियान

पहला मुद्दा

महिलाएवं बालिका हिंसा

>स्कूल आने-जाने वाली छात्राओं के साथ रास्ते में छेड़छाड़।

>छात्राओं का पीछा, मजाक और कमेंट्स करना।

>फाेन, एमएमएस, और अश्लील चित्र दिखाकर परेशान करना।

>सामाजिक डर से लड़कियां नहीं बता पाती छेड़छाड़ की घटना।

>पार्क में नशा करके आना।

>घरेलू हिंसा, प|ी बच्चों से मारपीट, दहेज यातना।

दूसरा मुद्दा

पुलिस-प्रशासनकी भूमिका

>महिला हेल्प लाइन निर्भया पेट्रोलिंग नियमित चले।

>मोबाइल सिम देते समय नियमों का पालन।

>आत्मरक्षा के लिए छात्राओं को कराते-मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग।

>सार्वजनिक स्थलों पर शिकायत पेटियां और आपात फोन नंबर।

>सूचना पर पुलिस वक्त पर आए।

>महिला पुलिसकर्मियों की संख्या में इजाफा।

तीसरा मुद्दा

जनताकी ये जवाबदेही

>घर सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं का सम्मान।

>छेड़छाड़ अपराध पर तत्काल विरोध करेंगे।

>मुसीबत में फंसी किशोरी या महिला की मदद।

>महिला चाइल्ड हेल्पलाइन पर सूचना।

>नुक्कड़ नाटक के जरिए जागरूकता।

>स्वयंसेवी संगठन बनाकर ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना।