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दिवाली के दिन भूखे रहना पड़ा क्योंिक टिफिन सेंटर की छुट्टी थी

7 वर्ष पहले
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वृद्धजनों के अधिकारों को लेकर एक्सीलेंस स्कूल के सभागार में बुधवार को चल रहे सेमीनार में उस समय चुप्पी छा गई जब भाषणों के बाद सवाल-जवाब सत्र में वयोवृद्ध समाजसेवी ने रिटायर्ड जज, सरकारी अफसरों और मानव अधिकार आयोग सदस्यों के सामने वृद्धाश्रम के बदइंतजामों की पोल खोलनी शुरू की। वे बोले, दिवाली के दिन बुजुर्गों को इसलिए भूखे रहना पड़ा क्योंकि उस दिन टिफिन सेवा की छुट्टी थी। उन्होंने एक-एक कर बुजुर्गों की पीड़ा गिनानी शुरू कर दी।

यह सुनकर मंच पर मौजूद एक अधिकारी ने स्वीकार किया कि अगर हम सभी वृद्धाश्रम देखने भी जाते तो यह बात पता नहीं चलती। भरोसा दिलाया गया कि हमारे संज्ञान में मामला आया है जिससे एसडीएम और सामाजिक न्याय विभाग अधिकारी को वाकिफ कराया जाएगा। यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस पर आयोग की हरदा इकाई ने किया। सूत्रधार आयोग के ज्ञानेश चौबे ने मंच संचालन करते हुए कहा, यह खुला मंच है जहां हम समाज में जागरूकता लाने की कोशिश करते हैं। मुख्य अतिथि पूर्व जिला न्यायाधीश डीके जैन ने बताया कि आज दोनों पीढ़ियों में समन्वय जरूरी है। आयोग जागरुक करता है। उसके पास शक्तियां नहीं हैं। बुजुर्ग खुद अपना समूह बनाएं। किसी चौराहे पर खड़े हों और नाबालिगों को वाहन चलाने से रोकने का काम करें। पहले तो वे हंसी का पात्र बनेंगे फिर उनके कार्य की सराहना होगी।

वयोवृद्ध नारायण दास मूंदड़ा बोले, वृद्धाश्रम में बुजुर्ग जेल की तरह रहते हैं। ऑफिस का ताला सुबह दस बजे खुलता है तब उनसे मिल सकते हैं। नाममात्र का आगंतुक रजिस्टर रखा है। भोजन-पानी रोजमर्रा की वस्तुओं की व्यवस्था देखने वाला नहीं। सेमीनार में वेदप्रकाश मिश्र, प्राचार्य डीएस रघुवंशी, कमलचंद जैन, एएसपी मलय जैन, डॉ. आनंद झंवर, अवनि बंसल ने भी अपने विचार रखे।

बुजुर्ग क्या चाहते हैं

>अगरएक बुजुर्ग की पीड़ा हम दूर कर दें तो मानव अधिकार दिवस पर चल रहा संवाद आयोजन सार्थक हो जाएगा।

>अधिकार बनाने या बताने और चर्चा करने से कुछ नहीं होगा, उन्हें पाया कैसे जाए, इसमें व्यावहारिक मदद होनी चाहिए।

सेमीनार में रिटायर्ड जज के सामने खुली पोल, वृद्ध बोले-