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लोगों को जबरन थमा रहे हैं ~ 50 के स्टाम्प
कोर्टपरिसर में दस रुपए का स्टाम्प लेने आने वाले लोगों को वेंडर जबरन पचास रुपए के स्टाम्प पकड़ा रहे हैं। मना करने पर स्टाम्प नहीं दिए जाने की बात कही जाती है। मजबूरी में लोगों को चालीस रुपए ज्यादा देना पड़ रहा है। सूचना के अधिकार के लिए स्टांप लेने गए एक व्यक्ति को दस रुपए का स्टाम्प देने से मना कर दिया गया।
कोषालय अधिकारी आनंद पटले ने बताया कि इस महीने कोषालय से हजारों रुपए के दस रुपए के स्टाम्प जारी हुए हैं। लेकिन कचहरी में बैठने वाले एक वेंडर ने स्टाम्प लेने गए एक व्यक्ति को साफ तौर पर दस रुपए के स्टॉम्प नहीं होने की बात कहते हुए लौटा दिया गया। बाद में एक दूसरे वेंडर ने दस रुपए का स्टॉम्प दिया। मंगलवार को छीपानेर निवासी प्रताप सिंह दस रुपए का स्टांप लेने कोर्ट परिसर स्थित वेंडर के पास पहुंचे। यहां वेंडर से उन्होंने स्टॉम्प मांगा लेकिन वेंडर ने यह कहते हुए मना कर दिया कि दस का स्टॉम्प बंद हो गया है। इसके लिए अब पचास रुपए का स्टाम्प लगेगा। ज्यादा पूछताछ करने पर स्टाम्प देने से भी मना कर दिया। बाद में एक दूसरे वेंडर से दस रुपए का स्टॉम्प खरीदा। झाड़पा निवासी शिवशंकर को भी दस रुपए की जगह पचास रुपए का स्टाम्प लेना पड़ा। वरिष्ठ वकीलों ने पूछताछ में बताया कि वेंडरों को तो कोर्ट परिसर में बैठकर स्टॉम्प बेचने का नियम ही नहीं है लेकिन इसके बाद भी वे सालों से यहां जमे हुए हैं। इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि लाइसेंस में स्थान भी शामिल किया जाता है। लाइसेंस में जिस स्थान का उल्लेख हैं वेंडर वहीं बैठते हैं।
^नया सर्कुलर आया है। इसमें शपथ पत्र 50 रुपए के स्टांप पर देना होगा। शिकायत मिलने के बाद स्टांप वेंडर से चर्चा की गई थी। उनके पास भी दस रुपए के स्टांप उपलब्ध हैं। उन्हें स्टांप देने से मना नहीं करने के लिए निर्देशित किया है।^ -अमरेश नायडू, उपपंजीयक
निर्देशित किया है