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दूसरों का जीवन बचाने 145 लोगों ने किया रक्तदान
हां, हमने रक्तदान किया। दूसरों का जीवन बचाने सोनम मोढ़ और उनकी 18 साल की बेटी साक्षी का यही कहना था। जिला रेडक्रॉस सोसाइटी के कैंप में रक्तदान करने का इतना जुनून था कि हजार-बारह सौ फार्म गए। सोसाइटी ने एक दिन में 1100 यूनिट ब्लड एकत्रित करने की घोषणा कर रखी थी। भोपाल और इंदौर से मॉडल ब्लड बैंक की वातानुकूलित बसें बुलवाई थीं। लेकिन पांच घंटे में सिर्फ 145 रक्तदाताओं से ही ब्लड लिया जा सका। कई छात्र-छात्राओं को अनफिट बता दिया गया तो कइयों को अगले कैंप में रक्तदान करने को कहा गया। उत्साह से रक्तदान करने आए हरदा और आसपास के सैकड़ों युवाओं को बिना रक्तदान किए लौटना पड़ा। ऐसा भोपाल के हमीदिया और इंदौर के एमवाय हॉस्पिटल में पर्याप्त ब्लड की उपलब्धता के चलते हुआ।
जिला अस्पताल में सुबह 11 बजे चुनिंदा रक्तदाताओं को प्रशस्तिपत्र और गुलाब के फूल भेंट कर रक्तदान शुरू कराया। खास बात यह है कि यह कैंप जिला रेडक्राॅस सोसाइटी ने शहीद दीपसिंह चौहान को समर्पित किया। आयोजन स्थल पर शहीद के भाई अनारसिंह और उनकी मां रतनकुंवर को बुलवाया गया। मां का शाल-श्रीफल से सम्मान किया। कलेक्टर रजनीश श्रीवास्तव तो सबसे पहले ब्लड देकर चले गए। ब्लड बैंक और दोनों बसों के सामने रक्तदान करने वाले युवाओं को लाइन में लगना पड़ा। इनमें कॉलेज स्टूडेंट सबसे ज्यादा थे। कुछ तो पहली बार रक्तदान करने कैंप में ही फार्म भर रहे थे। किसी को अपना ब्लड ग्रुप ही पता नहीं था। उम्र, वजन और सेहत संबंधी जुड़े कारणों से कई युवाओं के रिजेक्ट होने लगे। इंदौर से मॉडल ब्लड बैंक लेकर आए डॉ. अनिल जोशी ने पहले ही कह दिया कि एक दिन में रक्तदान का रिकार्ड बनाने के चक्कर में ऐसा हा़े कि ब्लड वेस्टेज हो जाए। अभी जरूरत के हिसाब से ब्लड लेंगे। दानदाता ज्यादा हैं तो हर महीने कैंप लगाए। इंदौर की बस तो अपनी जरूरत का 30 यूनिट ब्लड लेकर दोपहर 3 बजे ही रवाना हो गई। भोपाल की बस में 72 यूनिट ब्लड डोनेट करवाकर डॉ. हर्ष जाखड़िया भी चले गए। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में 43 यूनिट ब्लड डोनेट करवाया गया। कुल मिलाकर 145 यूनिट ब्लड लिया गया।
रक्तदान में लागू किए तीन मापदंड
>रक्तदाताकी उम्र 18 से 30 वर्ष हो।
>वजन 50 किग्रा से ज्यादा हो।
>हीमोग्लोबिन 12.5 से कम हो।
नहीं कर सके रक्तदान
अपनी मां के साथ आईं सौम्या सराफ को हीमोग्लोबिन कम बताकर लौटा