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जाति प्रमाण पत्रों का हिसाब नहीं रखा, तहसीलदारों के रीडरों को नोिटस थमाए

6 वर्ष पहले
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{तीन दिन में नोटिस का जवाब देने को कहा

सिटीरिपोर्टर|हरदा

हंडियातहसील दफ्तर में तहसीलदार और नायब तहसीलदार के रीडरों को भी कलेक्टर ने शनिवार को नोटिस जारी कर दिए। इन्हें कार्यालयीन कामकाज में लापरवाही और उदासीनता बरतने पर तीन दिन में नोटिस का जवाब देने को कहा गया है। इनमें तहसीलदार के रीडर रमाकांत गौर और नायब तहसीलदार के रीडर नवलकिशाेर कटारे हैं।

उल्लेखनीय है कि अपर कलेक्टर ने दो दिन पहले हंडिया के तहसील कार्यालय का निरीक्षण किया था। यहां के रीडर ने तो रजिस्टर ढंग से नहीं रखे। इनका सत्यापन पीठासीन अधिकारी ने नहीं किया। रजिस्टरों में पिछला रिकार्ड उतारा ही नहीं गया। केस डेढ़ माह की पेशी देकर लेट किए गए।

तहसील न्यायालय में लंबित नामांतरण एवं बंटवारा प्रकरणों में नियम-कायदों का पालन नहीं किया गया। जाति प्रमाण पत्रों के आवेदनों का लेखा-जोखा नहीं रखा गया। कितने प्रकरण एसडीओ राजस्व हरदा से जांच के लिए आए। कितने प्रकरणों में जांच कर प्रतिवेदन एसडीएम हरदा को भेज दिए। इसका ब्योरा रजिस्टर में नहीं मिला। रुके और सुलझे केस की फाइलंें अस्त-व्यस्त रखी हुई थीं।

सहकारी बैंक की कालातीत ऋणों के वसूली हेतु 156 केस पाए गए। किंतु केस दर्ज होना नहीं पाए गए। केसों में मांगपत्र जारी कर 29 जनवरी की पेशी नियत की गई थी। उक्त तारीख को माॅगपत्र तािमल होकर मिले हैं लेकिन मांगपत्र प्रकरणों में लगाए नहीं गए हैं।

ऐसी ही लापरवाही नायब तहसीलदार के रीडर ने की। नायब तहसील न्यायालय के रुके एवं सुलझे केस का प्रस्तुत मासिक पत्रकों से मिलान नहीं होकर अंतर पाया गया। जिससे पता चलता है कि मनमाने ढंग से प्रकरणों की संख्या वरिष्ठ कार्यालय भेजी जा रही है। निरीक्षण के दौरान यहां पिछले तीन साल के 179 जाति प्रमाणपत्र अनाधिकृत रूप से अलमारी में रखे पाए गए। इस संबंध में पूछे जाने पर संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया। अतिक्रमण के कई प्रकरण बिना दर्ज किए एवं पेशी से उतरे हुए पाए गए।

इन्हें पीठासीन अधिकारी के समक्ष पेश नहीं किया गया। न्यायालय में विगत 2 अगस्त 2014 से केशबुक नहीं लिखी गई है। पीठासीन अधिकारी ने 2 फरवरी 2015 को नर्मदाप्रसाद कीर से 15 हजार रुपए की रसीद काटी पर पैसा आज तक खजाने में जमा नहीं किया गया। जो शासकीय राशि के गबन की श्रेणी में आता है।