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- बीमार बच्चों को गोद में लेकर इलाज कराने के लिए भटकते रहे परिजन
बीमार बच्चों को गोद में लेकर इलाज कराने के लिए भटकते रहे परिजन
बच्चों को देखने नहीं आए डॉक्टर
{शिकायतों के बाद भी व्यवस्था में बदलाव नहीं
हेल्थिरपोर्टर|हरदा
जिलाअस्पताल में इलाज के नाम पर लापरवाही बरती जा रही है। इसका उदाहरण शनिवार को देखने को मिला। ओपीडी टाइम में सिर्फ एक डॉक्टर कई मरीजों का इलाज करते नजर आए। वहीं बच्चों के डॉक्टर चेंबर में नहीं होने के कारण महिलाओं और पुरुषों को बच्चों को गोद में लेकर इधर-उधर भटकते रहे।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। शिकायतों के बाद भी व्यवस्था में बदलाव नहीं होने के कारण मरीजों के साथ अस्पताल के कर्मचारी भी नाखुश है। जानकारी के मुताबिक अस्पताल में ओपीडी के समय में अधिकांश डॉक्टर या तो नदारद रहते हैं या तो समय से नहीं आते हैं।
ऐसे में बीमार लोगों को डॉक्टरों की राह देखकर और ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। शनिवार को जिला अस्पताल में ऐसे ही नजारे देखने को मिले। शाम के समय ओपीडी टाइम में एक ही डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे थे। ओपीडी चेंबर में अन्य डॉक्टरों की कुर्सियां खाली पड़ी हुई थी। चेंबर के दोनों और महिला और पुरूषों की लंबी कतार लगी हुई थी। लेकिन इसके बाद भी मरीजों के इलाज में अस्पताल प्रबंधन द्वारा लापरवाही बरती जा रही है।
अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है
^अस्पतालमें डॉक्टरों की कमी है। शिशु रोग विशेषज्ञों की एसएनसीयू में ड्यूरी रहती है। अस्पताल में मरीजों की सुविधाओं का ध्यान रखा जाता है। -डॉ. एसके सेंगर, सिविल सर्जन
डॉक्टर के आने का इंतजार 45 मिनट किया
^करीब45 मिनट तक प्रथम तल पर स्थित चेंबर में डॉक्टर की आने की राह देखते रहे। इसके बाद भी कोई डॉक्टर नहीं आया। ओपीडी से बच्चों को दिखाने के लिए प्रथम तल भेजा गया था। यहां कई लोग परेशान होते रहे। -शहजाज, हरदा
बालक को इलाज कराने के लिए लाए थे
^बालकको बुखार आने पर इलाज के लिए अस्पताल लेकर आए थे। इधर से उधर भटकते रहे। कई महिलाएं भी थी लेकिन डॉक्टर नहीं दिखाई दिए। बाद में ओपीडी में बैठे डॉक्टर को बच्चों को दिखाया गया। -उमेश, हरदा
हरदा। ओपीडी से डॉक्टर नदारद।