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पिता को महीने में एक दिन मिल सकेगा बेटी का संरक्षण

4 वर्ष पहले
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प|ी की जहर खाने से हो गई थी मौत

पिता को दोषी ठहराते हुए 5 साल की सजा हुई है

भास्कर संवाददाता | हरदा

शादी के तीन साल बाद एक नव विवाहिता की ससुराल में मौत हो गई थी। इसके बाद मृतिका की 7 माह की बेटी को नाना-नानी साथ ले गए। कोर्ट ने मृतिका के पति राहुल जाट को दहेज प्रताड़ना से मृत्यु का दोषी ठहराया। राहुल पिता राधेश्याम जाट ने अवस्यक बेटी को अपने सरंक्षण में लेने कुटुंब न्यायालय में दावा लगाया था। कोर्ट ने बेटी को संरक्षण में देने से इंकार करते हुए माह में एक और त्योहारों पर नाना-नानी की इजाजत से मिलने का आदेश दिया।

अनावेदक रेवाराम पिता शिवनारायण जाट के अधिवक्ता प्रवीण सोनी ने बताया रेवाराम की बेटी रजनी का विवाह 2011 में धार्मिक रीति रिवाज से सोनखेड़ी निवासी राहुल जाट से हुआ था। तीन साल बाद रजनी की जहर खाने से मौत हो गई। तब उनकी बेटी चाहत 7 माह की थी। जिसे बेटी की मौत के बाद उसके नाना रेवाराम व नानी अयोध्या बाई अपने साथ ले गए। वहीं रजनी के परिजनों ने बेटी को दहेज के लिए प्रताड़ित कर मारने का आरोप लगाया था। पुलिस ने जांच की। इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने राहुल को दोषी ठहराते हुए 5 साल की सजा सुनाई। इसके बाद से मामला हाईकोर्ट में अपील में विचाराधीन है।

एडवाेकेट सोनी ने बताया अवयस्क बेटी चाहत को अपने संरक्षण में लेने के लिए राहुल ने कुटुंब न्यायालय में 15 दिसंबर 12 को दावा पेश किया था। इस मामलेे में प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय भारती बघेल ने दोनों पक्षों को सुनी। इस मामले में पेश की गई साक्ष्य और गवाहों के कथन सुने। इसके बाद अपने फैसले में कहा, अभी राहुल की उम्र को देखते हुए इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि वह दूसरी शादी नहीं कर सकता है। ऐसे में अवस्यक को संरक्षण से हटाकर पिता को देना उचित नहीं है। वहीं न्यायाधीश ने यह भी माना कि आवेदक अवस्यक का पिता होकर नैसर्गिक संरक्षक है। उसे अपनी बेटी के स्नेह से वंचित किया जाना न्याय संगत नहीं है। इस कारण उसे अपनी बेटी से माह में एक बार और त्योहारों पर नाना-नानी की अनुमति से समय व तिथि तय कर मिलने का अधिकार रहेगा। स्कूल व ट्यूशन की छुट्टी के समय में मिलने की अनुमति नाना-नानी से लेनी होगी।

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