कांग्रेसियों ने कहा शहर की सीमा बढ़ाएं, नहीं तो करेंगे आंदोलन
वर्तमान व पूर्व नपाध्यक्ष के बयान में विरोधाभास
भास्कर संवाददाता | हरदा
नगरीय सीमा का दायरा बढ़ाने के लिए कांग्रेस ने 8 साल पहले परिषद की बैठक में प्रस्ताव पारित कर शासन काे अगली कार्रवाई व मंजूरी के लिए भेजा था। लेकिन बीच में लोक सभा, विधानसभा चुनाव और जनगणना के चलते शासन स्तर से इस मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं सका। शहर के बढ़ते दायरे, लगातार बढ़ती अवैध कालोनियों की संख्या और खेती की जमीन को कॉलोनियों में बदलने की अंधी होड़ के कारण अवैध कालोनियों का ग्राफ अफसरों की मिलीभगत से बढ़ रहा है। लेकिन इन इलाकों के वाशिंदों को काॅलोनाइजरों के दावे के मुताबिक बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कांग्रेस ने मुख्य सचिव के नाम मंगलवार को एसडीएम को ज्ञापन दिया। इसमें जल्द कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पवार ने कहा नगर पालिका क्षेत्र हरदा से लगी हुई अनेक कालोनियां और रहवासी इलाके, नगरीय सीमा में शामिल नहीं हैं। रिकार्ड के मुताबिक इन्हें आसपास के ग्राम पंचायतों में शामिल माना जाता है। इस परिस्थिति में ऐसे आवासीय इलाकों के वाशिंदों को बिजली, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सहुलियतों से महरुम होना पड़ रहा है। वरिष्ठ पार्षद सुरेंद्र सराफ ने बताया तत्कालीन कांग्रेस शासित नगर पालिका के कार्यकाल में करीब 8 साल पहले शहर की सीमावृद्धि का प्रस्ताव परिषद से पारित कर मंजूरी व अागामी कार्रवाई के लिए मप्र शासन को भेजा था। लेकिन सरकार की उपेक्षित रवैए के कारण आज तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। एडवोकेट आदित्य गार्गव ने कहा शासन द्वारा कार्रवाई नहीं हुई। तब भी कांग्रेस ने इस आशय का ज्ञापन अधिकारियों को दिया था। इसके बावजूद बात आगे नहीं बढ़ी। सुखराम वामने, मोहन विश्नोई, अशोक मोयल, नन्हेलाल तिवारी, रविशंकर शर्मा, संजय अग्रवाल आदि ने कहा जनहित से जुड़े इस मामले में शासन प्रशासन ने जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की तो जनहित में आंदोलन किया जाएगा। इस संबंध में एडीएम जीएस मिश्रा से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किया।
सीमा बढ़ने से इन्हें फायदा
शहर की सीमा में इजाफा हुआ तो आसपास की करीब 5 ग्राम पंचायतों को नगरीय क्षेत्र में शामिल होने का मौका मिलेगा। इससे इन पंचायतों के रहवासियों को नपा द्वारा दी जाने वाली बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। प्रस्तावित सीमा वृद्धि दायरे में बैरागढ़, छोटी हरदा, ऊड़ा, खेड़ीमेहमूदाबाद, अबगांव का इलाका हरदा में शामिल हाे सकेगा।
आठ साल पहले भेजा था प्रस्ताव
तत्कालीन नपाध्यक्ष हेमंत टाले कांग्रेस शासित नपा ने 8 साल पहले प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजा था। रिमाइंडर भी भेजे। लोकसभा, विधानसभा चुनाव व जनगणना की वजह से ये काम रुका रहा। जनगणना हुए 5 साल हो गए। फिर भी शहरी सीमावृद्धि नहीं हुई। कई पंचायत क्षेत्र में आते हैं, जहां सुविधाएं नहीं है। शहर में शामिल गांवों को पंचायतों में शामिल कर दिए। कांग्रेस ने ज्ञापन व रिमाइंडर भी दिए। इससे जनता मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।
शहर की सीमा वृद्धि को लेकर मंगलवार को मुख्य सचिव मप्र शासन के नाम ज्ञापन दिया है। इसमें शहरी सीमा वृद्धि की मांग व पूर्व में पारित कर शासन को भेजे प्रस्ताव का जिक्र है। इस संबंध में नपा सीएमओ व अपर कलेक्टर सही जानकारी दे सकेंगे। साहबलाल सोलंकी, अनुविभागीय अधिकारी हरदा
फाइल अपडेट कर भेजी जाएगी
नगरपालिका अध्यक्ष साधना जैन ने कहा 2006 में सीमावृद्धि का प्रारंभिक प्रकाशन हुआ था। दावे आपत्ति बुलाए थे। लेकिन बाद में कांग्रेसी परिषद ने अंतिम प्रकाशन की कार्रवाई नहीं की। 3 दिन पहले प्रांरभिक प्रकाशन की फाइल आई है। इसमें ग्वाल नगर, श्रीराम कालोनी, सुदामानगर, खेड़ीमेहमूदाबाद को छोड़ दिया था। तहसीलदार ने यह चूक पकड़ी। नपा के पटवारी, आरआई, सीएमओ तहसीलदार मिलकर इसे दुरुस्त कर रहे हैं। फाइल अपडेट कर प्रारंभिक प्रकाशन के लिए भेजी जाएगी।
पहले देते थे नपा चुनाव में वाेट
नगरीय क्षेत्र में कुछ इलाके ऐसे हैं जिन्हें पहले नपा में शामिल माना जाता था। नपा चुनाव में भी उन्होंने वोट डाले थे। तब तक इन कालोनियों को नपा के रिकार्ड के अनुसार अवैध माना जाता था। लेकिन पिछले चुनाव में ऐसी ही कुछ कालोनियों को आसपास की ग्राम पंचायतों में शुमार कर दिया। अब इन रहवासी क्षेत्रों के लोग छोटी-छोटी समस्याओं, राशन कार्ड, दूसरे प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पंचायत व नपा के बीच चक्कर लगा रहे हैं। प्रशासनिक सूत्र बताते हैं पूर्व में नपा में शामिल माने गए इन क्षेत्रों के नाम गजट नोटिफिकेशन में नहीं थे। जिन्हें वर्ष 2011 में हुए नपा चुनाव में नपा सीमा में नहीं माना गया।
एसडीएम को ज्ञापन देते कांग्रेसी।