सशक्तिकरण अधिकारी बोलीं, संचालक को शांति बेले ने मेरे खिलाफ भड़काया
अबगांव खुर्द में न्यू ज्ञान शिखर शिक्षा समिति द्वारा अनाथ बच्चों को रखने के लिए संचालित बालगृह की मान्यता का आवेदन खारिज होने के मामले में अब महिला सशक्तिकरण अधिकारी डॉ अर्चना दीक्षित ने महिला एवं बाल विकास अधिकारी शांति बेले पर संचालक को भड़काने का आरोप लगाया है। यह बात उन्होंने मीडिया द्वारा उन पर लगे 50 हजार रुपए रिश्वत मांगने के आरोप के जवाब में कही। वे अबगांव खुर्द के बालगृह में रविवार दोपहर कार्रवाई के लिए पहुंची थी। (वीडियो भास्कर के पास उपलब्ध है)
अबगांव खुर्द में अनाथ बच्चों की परवरिश के लिए एनपी विश्वकर्मा द्वारा बालगृह चलाया जा रहा है। इसमें 24 बच्चे हैं। मान्यता के लिए आवेदन दिया था। जिसे 8 फरवरी को खारिज कर दिया। ऐसे में बच्चों को वहां से कहीं और शिफ्ट करने की कार्रवाई को लेकर महिला सशक्तिकरण अधिकारी रविवार को अबगांव खुर्द पहुंची। संचालक उपस्थित नहीं होने से पंचनामा बनाकर एक बुजुर्ग महिला का अंगूठा लगवाया। बालगृह में रह रहे बच्चों ने बताया उन्हें घर जैसे माहौल में रखा जा रहा है। उनके साथ परिवार के सदस्य जैसा व्यवहार किया जाता है। उनकी हर सुख सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा जाता है।
महिला सशक्तिकरण अधिकारी डॉ अर्चना दीक्षित ने कहा बच्चे कहां से आए हैं, उनके रिकार्ड की जानकारी लेना था, लेकिन संचालक की अनुपस्थिति के कारण ऐसा नहीं हो सका। विभाग ने 8 फरवरी को मान्यता का आवेदन निरस्त कर दिया। इन बच्चों को आगे रजिस्टर्ड या सरकारी संस्था में रखेंगे। ऐसे बच्चों की देखभाल के लिए चाइल्ड लाइन प्रतिबद्ध है। वे बाल कल्याण समिति के सामने पेश करेंगे।
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रावधान व कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। मैंने संचालक से 50 हजार रुपए रिश्वत नहीं मांगी। उन्हें शांति बेले ने मेरे खिलाफ भड़काया है। कार्रवाई से नाराज होकर विश्वकर्मा ने अनर्गल आरोप लगाया है। मानहानि का केस करूंगी।
शिफ्टिंग के पहले पूरा ब्यौरा देना होगा
बच्चों के रेस्क्यू के लिए महिला एवं बाल विकास अधिकारी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। गाड़ी की व्यवस्था नहीं की। उनकी शिफ्टिंग के कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए। यह भी पता करना होता है कि क्या बच्चे स्कूल जाते हैं, जाते हैं तो कहां। नई जगह से स्कूल की दूरी क्या होगी। उनके आने जाने का साधन क्या होगा। शिफ्टिंग से पहले मय फोटो पूरा ब्यौरा देना होता है। पुलिस को सूचना तक नहीं दी। विनोद श्रीवास्तव, एसडीओपी हरदा
लिखित रिकार्ड हो ले आइए मैं जवाब देती हूं
रात के 10 बज रहे हैं। मेरे ख्याल से इस समय फोन लगाना अनुचित है। यदि डॉ अर्चना दीक्षित ने मुझ पर कोई आरोप लगाया है, आपके पास लिखित रिकार्ड हो तो आप ले आइए मैं अभी जवाब देती हूं। शांति बेले, कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग हरदा
हरदा। बालगृह की बुजुर्ग महिला से पंचनामा पर अंगूठा लगवाते अधिकारी।