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लम्हों को बेकार गंवाया न करो, काम की बात करो वक्त को जाया न करो

6 वर्ष पहले
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मध्यप्रदेश लेखक संघ की जिला इकाई द्वारा वसंत पंचमी पर रविवार को मासिक काव्य गोष्ठी हुई। इस दौरान कवियों ने रचनाओं की प्रस्तुतियां दी। इस दौरान कुंदन कपूर ने तुम अगर मैया के दर पर आया करो, लाजमी है कि मैया तुम पर कृपा करे। गजलकार रहमत फाइकी ने दिल ही जाने या खुदा जाने, मेरी रुहदाद कोई क्या जाने। लक्ष्मीकिशोर बाजपेई ने कितने अपनों को खो बैठे हो, अपनों से नाराज हो बैठे हो। कवि अभय गौड़ ने मायके से आया मेरा कंगना। वहीद कौशर ने भीघे-भीघे नयन, दुख उठाता ये तन। जयकृष्ण चांडक ने चलो नजरें चुराकर देखते है, तुम्हें अब भुलाकर देखते है। दिनेश व्याकुल ने कीमती लम्हों को बेकार गवाया न करो, काम की बात करो वक्त को जाया न करो।



वहीं त्रिलोक शर्मा ने चलने लगी बयार, अब वसंत आया। इसके साथ ही जीपी गौर, गोविंद हाशाणी, दिनेश मानपुरी, बलराम काले, मो शफी नादान, रतन सोलंकी, बालमुकुंद ओझा, कपिल दुबे, पीसी पोर्ते, शैलेंद्र जलखरे और पं तिवारी ने काव्य पाठ किया।