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किसान ने पांच एकड़ जमीन में लगाई दस प्रकार की सब्जी

6 वर्ष पहले
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गेहूं और सोयाबीन से नुकसान झेल चुके अबगांवकलां गांव के किसान हरगोविंद के लिए सब्जी की खेती लाभ का धंधा बन गई है। किसान खेत से ही प्रतिदिन हजारों रुपए की सब्जियां बेच रहे हैं। खास बात तो यह है कि सब्जी बेचने के लिए उन्हें मंडी तक भी नहीं आना पड़ता है।

जिला मुख्यालय से करीब दस किमी दूर इंदौर बैतूल नेशनल हाईवे पर सब्जी का खेत राहगीरों का ध्यान खींच रहा है। सड़क किनारे ताजी, हरी सब्जियां खरीदने के लिए यहां दो पहिया, चार पहिया वाहनों के अलावा बसों के भी ब्रेक लग जाते हैं। गेहूं और सोयाबीन से नुकसान झेल चुके किसान के इंदौर-बैतूल नेशनल हाईवे से लगे अपने पांच एकड़ खेत में इन दिनों कई प्रकार की सब्जियां लहलहा रही है। जिससे उन्हें बेहतरीन उत्पादन भी मिल रहा है।

किसान द्वारा पहली बार की सब्जी की खेती को देखने के लिए प्रतिदिन कई किसान भी उनके खेत पहुंच रहे हैं। आलू, प्याज, मटर, मक्का, टमाटर, गोभी, भिंडी, बेगन और धनिया से बीते चार महीने में किसान को एक लाख रुपए से अधिक की आय हुई है। खास बात तो यह है कि सब्जियों को बेचने के लिए किसान को मंडी का मुंह भी नहीं देखना पड़ रहा है।

1 साल में डेढ़ हजार

हेक्टेयर बढ़ा रकबा

बीते कुछ सालों में जिले के किसानों की उद्यानिकी फसलों की ओर रुचि बढ़ी है। उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक केएस मंडलोई ने बताया साल 2015 में उद्यानिकी का रकबा करीब साढ़े सात हजार हेक्टेयर है जो बीते साल से करीब डेढ़ हजार हेक्टेयर अधिक है। किसानों द्वारा सब्जी की खेती को बढ़ावा देने की एक मुख्य वजह प्रतिदिन की आवक मिलना भी है।

पांच लाख से अधिक पैदावार की संभावना
किसान ने बताया कि गेहूं से करीब एक लाख रुपए की पैदावार मिलती थी, वहीं सोयाबीन से हर साल नुकसान हो रहा था। लेकिन पांच एकड़ में सब्जी की खेती करने से साल में पांच लाख से अधिक की पैदावार मिलने की संभावना है। सब्जी से अच्छी पैदावार और आवक मिलने से किसान ने आगामी सालों में भी सब्जियों की खेती करने का निर्णय लिया गया है।

किसान हरगोविंद ने बताया सोयाबीन की फसल से हर साल नुकसान हो रहा था। पिछले पांच सालों से सोयाबीन का उत्पादन नहीं मिल पा रहा था। वहीं गेहूं की फसलें भी प्रभावित हो रही थी। इससे आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में पारंपरिक खेती को छोड़कर सब्जी लगाने का फैसला किया गया। शुरुआती दौर में सब्जी लगाने के बाद देखरेख में खासा परिश्रम तो करना पड़ा आई लेकिन इसका सामना किया गया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में खेत में आलू, प्याज, मटर, मक्का, टमाटर, गोभी, भिंडी, धनिया और बेगन की सब्जी लहलहा रहा है। किसान ने बताया कि प्रतिदिन 40 से 50 किलो सब्जियां प्रतिदिन खेत से ही बिक रही है।

खेत में फसल दिखाते अबगांवकलां गांव के किसान हरगोविंद।

हर साल हो रहा था नुकसान
सरकारी योजनाओं की नहीं मिलती जानकारी
किसान ने बताया उद्यानिकी विभाग में उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है लेकिन इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विभाग से सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं मिल पा रही है। किसान हरगोविंद ने बताया योजना का लाभ मिले तो सब्जी की खेती उन्नत तरीके से करने में मदद मिलेगी।