पितरों को दिया जा रहा जल
हटा. बुंदेलखंडकी काशी कहे जाने वाले हटा नगरी से निकलने वाली सुनार नदी के घाटों पर पितृ पक्ष में पितरों को पानी देने की रस्म पूर्ण कराई जा रही है। नदी के सभी घाटों पर यजमानों द्वारा अपने पंडितों के सानिध्य में यह क्रिया पूर्ण हो रही है। सूर्योदय से ही पितरों को पानी देना प्रारंभ हो जाता है को करीब 8.30 बजे तक चलता है। सुनार नदी के सुरई घाट पर पं. ब्रजेश दुबे के द्वारा यह कार्य पूर्ण कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हिंदु धर्म में वर्ष में 16 दिन श्राद्ध पर्व के होते हैं। इन दिनों अपने पूर्वजों को पानी देकर, श्राद्ध पर्व मनाकर उनकी आत्मा की शांति की कामना की जाती है।पं. शशिकांत दुबे ने बताया कि पितृपक्ष में अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने, उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का यह महापर्व है। श्राद्ध पूरी तरह से श्रद्धा के भाव से जुड़ा है। मान्यता है कि पितरों को पानी देने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है साथ ही उनका सदैव आशीर्वाद बना रहता है। परिवार पर आने वाले अनिष्ट, कष्ट, दुखों को भी पूर्वज टालते हैं।